ख़ुश रहने का राज

Read Time0Seconds
sanjay
स्नेह प्यार से ही हम,
जीवन को जीते हैं।
तभी तो हर हाल में,
हम खुश रहते हैं।
देखा नही कभी भी,
किसी की ऊंचाइयों की तरफ।
स्वंय की योग्यता के अनुसार,
अपना जीवन को जीते हैं।।
न ही करता हूँ किसी से,
भी कोई होड़ा होड़ी।
स्वंय को देखकर ही,
अपनी रचनायें लिखते हैं।
और मिलते है जो भी,
पाठको के कमेंट हमें,
उसमें खुश हम रहते हैं।।
सादा जीवन बड़ी ही,
मस्ती के साथ जीते हैं।
और हर दम हर हाल में,
खुशी के साथ जीवन जीते हैं।
शायद लोग इसको हमारी,
खुशी का राज समझते हैं।।
और हमारी लेखनी पर ,
अच्छी प्रतिक्रियां लोग देते हैं।।
परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

रात की रात

Fri May 31 , 2019
रात की रात से बात होती रही दिन शामियाने में बदन धोता रहा हो गया मुल्क सारा ख़ूनम-खून और सब नियम-कानून सोता रहा दूजे की पोशक में जिस्म लपेट के सरे-शाम अपना वजूद खोता रहा बच्चे भूखे से बिलबिलाकर मरते रहे और धर्म पर विचार-विमर्श होता रहा आज़ादी हर साल […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।