भीगा-भीगा प्रेम

0 0
Read Time3 Minute, 24 Second

“कभी-कभी बहुत छोटी सी बात ग्रंथि बन जाती है जो बाद में किसी न किसी बीमारी के रूप में बाहर आती है इसलिए मन की बात कह देना बहुत जरूरी है ।आज मौका है आपके लिए अगर आप किसी को सॉरी बोलना चहाते हैं तो घबराएं नहीं, कहकर खुद को हल्का कर लें” कहते हुए वो मोटिवेशनल स्पीकर ने सामने बैठे श्रोताओं से बोलने का आग्रह किया।

कुछ देर मौन पसरा रहा। थोङ़ी देर बाद शुभम् उठा, धीरे-धीरे कहना शुरू किया “सर, बहुत वर्षों से अपनी पत्नी को सॉरी बोलना चाहता था पर नहीं बोल पाया।

बात उस समय की है।जब बङ़े भैया की शादी हुई। शादी गांव में थी। दो दिन के बाद हम सब लोग शहर के लिए रवाना हुए पर हम शहर पहूंचते इससे पहले ही एक जबरदस्त एक्सीडेंट में हमने भैया को खो दिया। परिवार पर वज्रपात….जब परिवार संभला तो बहू की सूनी मांग का ख्याल आया। हाथों की मेहंदी उतरने से पहले जिसका जीवन उजाङ़ हो गया था अब उसके बारे में सोचना था। पिताजी का ख्याल था कि जो हो गया सो हो गया पर अब इस लङ़की को बिलखते नहीं देख सकते।सब कुछ ठीक करने के लिए इसकी शादी छोटे बेटे के साथ हो जाए तो अच्छा रहेगा। मुझसे पूछा गया पर पारिवारिक स्थितियों को देखते हुए मैं कुछ कहने की स्थति में नहीं था। हमारी शादी हो गई पर अप्रत्याशित इस घटनाक्रम को मैं शायद हजम नहीं कर पाया था फलत: एक लम्बा समय बीतने के बाद ही मैं अपने पति धर्म का पालन कर पाया।आज हमारे दो बच्चे हैं…., हम खुशहाल दंपति हैं…..,अगले दो साल बाद हम अपनी सिल्वर जुबली मनाएंगे…. पर शुरू के दो वर्ष मेरी पत्नी ने कैसे गुजारे होंगे…., कैसे बिना प्रेम के भी वो मेरे प्रति समर्पित यह पाई होगी…., कैसे कभी किसी को अहसास तक नहीं होने दिया कि बंद कमरे में भी हमारी दिशाएं अलग-अलग थी…., कैसे धीरे-धीरे उसने मेरे मन में जगह बनाई….. ऐसे बहुत से प्रश्न जो मैं पूछना चाहता था पर कभी पूछ नहीं पाया…. बहुत बार माफी मांगना चहाता था….., बताना चाहता था कि उन दिनों मैं किस कशमकश से गुजर रहा था….., माफी मांगना चाहता था…., पूजा करना चाहता था कि उसने बिना किसी प्रतिवाद के हमारे मां-पिताजी की बात को माना और सदैव उसका मान रखा….. कहते-कहते फफक-फफक कर रो पङ़ा शुभम्। श्रोताओं के बीच बैठी पत्नी की आंखों से आंसुओं की गंगा प्रवाहित हो रही थी।

भीगे-भीगे से इस प्रेम ने वहां बैठे हर श्रोता की आंख को भिगो दिया था।

डॉ पूनम गुजरानी
सूरत

matruadmin

Next Post

अन्तर्राष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस

Fri Oct 2 , 2020
बोझ ना समझो बुजुर्गो को तुम, बुजुर्गों से ही है वजूद तुम्हारा। बुजुर्ग ना होते तो तुम कैसे होते, नामों निशान ना तुम्हारा होता। रूखा सूखा खुद ही खा कर, अच्छा भोजन तुम्हे खिलाया। कितनी रातें खुद ना सोए, लोरी गा कर तुम्हे सुलाया। उंगली पकड़कर चलना सिखाकर, अच्छे बुरे […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।