मैं निडर उद्दंडतापूर्वक लिख रहा हूँ

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मैं निडर उद्दंडतापूर्वक लिख रहा हूँ।
तो ही कौडियों के भाव बिक रहा हूँ।।

तुम्हारे ठुकराने व दुत्कारने पर देखो।
मैं तो सर्वश्रेष्ठ भी अत्याधिक रहा हूँ।।

अंतर कहां पड़ता है मूर्ख नासमझो।
मैं राष्ट्रभक्त और अध्यात्मिक रहा हूँ।।

भले बेचे समाचारपत्र मैंने सड़क पर।
फिर भी देखो सम्पन्न आर्थिक रहा हूँ।।

मिट्टी के माधवो मिट्टी को पहचानों।
जिसकी खुश्बु का ओलंपिक रहा हूँ।।

इंदु भूषण बाली

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रामनवमी पर पूज्य सन्तों व विश्व हिन्दू परिषद का आवाहन

Mon Mar 30 , 2020
प्रिय रामभक्तों, भवदीय युगपुरुष स्वामी परमानन्द गिरि महंत नृत्यगोपालदास अखण्ड परमधाम, हरिद्वार मणिरामदास छावनी, अयोध्या सदस्य, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र अध्यक्ष-, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र एडवोकेट आलोक कुमार जस्टिस विष्णु सदाशिव कोकज कार्याध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद अध्यक्ष, -विश्व हिन्दू परिषद जारी कर्ता : विनोद बंसल प्रवक्ता-विहिप Post Views: 5

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।