डा. शलभ की पाँचवी किताब ‘कोई एक आशियाँ’ स्टेट-ऑफ-द-आर्ट लाइब्रेरी में शामिल

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मैसूर (कर्नाटक) |
स्थित इंफोसिस के स्टेट-ऑफ-द-आर्ट लाइब्रेरी ने डा. स्वयंभू शलभ की चर्चित किताब ‘कोई एक आशियाँ’ को अपने संग्रह में शामिल किया है। इसकी सूचना लाइब्रेरी एसोसिएट श्री वीरय्या रुद्रीय ने मेल के जरिये दी।
बिहार के किसी लेखक की किताब का इस विश्व स्तरीय लाइब्रेरी में स्थान मिलना सभी बिहारवासियों के लिए गौरव की बात है।
ग्लोबल एजुकेशन सेंटर के अंदर स्थित इस लाइब्रेरी को दुनिया के सबसे बड़े कॉर्पोरेट लाइब्रेरी के रूप में  जाना जाता है। इस लाइब्रेरी में साइंस टेक्नोलॉजी की किताबों के साथ साथ कला साहित्य की किताबों का भी वृहद भंडार है।
इसकी आलीशान इमारत ग्रीक आर्किटेक्चर का एक अद्भुत नमूना है। इस लाइब्रेरी में विश्व के जाने माने लेखकों की 75000 किताबें, 12000 ऑनलाइन जॉर्नल एवं 102 ई बुक सब्सक्रिप्शन उपलब्ध हैं।
विदित है कि डा. शलभ की यह पाँचवी किताब पिछले वर्ष अमेजॉन एवं एडूक्रिएशन पब्लिशिंग द्वारा प्रकाशित हुई। इसे अमेजॉन किंडल, गूगल बुक्स, बुक्सकैमेल और डूरस्टेपशॉपी ने ई बुक एवं पेपरबैक में दुनिया भर के पाठकों के लिए उपलब्ध कराया।
इससे पूर्व डा. शलभ की चौथी किताब ‘श्रृंखला के खंड’ चेन्नई, मुंबई और कोलकाता के सेंट्रल लाइब्रेरी के साथ दिल्ली के ज्ञानपीठ पुस्तकालय में रखी गई थी।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।