तुम हो

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sachin

मेरे जीवन का आधार हो तुम,, मेरी खुशीयों का संसार हो तुम,,
बड़ी मुश्किल से तुमको पाया है,, मेरी लोरी का अल्फाज़ हो तुम,,
मेरी आंखो के सितारे हो,, मेरे आंगन के राज दुलारे हो,,
मेरे जीवन रूपी आसमान के, तुम ही तो ध्रुव तारे हो,,
मेरे साजन की छाया हो, मेरी चोखट का श्रृगांर हो तुम,,
मेरे जीवन का आधार हो तुम, मेरी खुशीयों का ससांर हो तुम,,
मेरे उपवन के पौधे तुम, तुम ही फूल चमन हो,,
मेरी आंखो में सजते, तुम ही नयन कमल हो,,
मेरे आचंल के इन्द्रधनुष के , अद्रित रंगदार हो तुम,,
मेरे जीवन का आधार हो तुम, मेरी खुशीयों का संसार हो तुम,,
मेरे खुश होने की आदत हो, मेरे जगने का बहाना हो,,
मैं हुं तेरी यशोदा मां ,, तुम ही तो मेरे कान्हा हो,,
तेरी मीठी बोली जैसे , नंदलाला का अवतार हो तुम,,
मेरे जीवन का आधार हो तुम, मेरी खुशीयों का ससांर हो तुम,,
राणा की यही गुज़ारिश रब से, बस इतनी सी फरमाईश है,,
बेटा चले ना गलत मार्ग पर, हर मां की यही बस ख्वाहीश़ है,,
मेरे ख्वाबों की दुनिया का, एक सच्चा सपना साकार हो तुम,,
मेरे जीवन का आधार हो तुम, मेरी खुशीयों का संसार हो तुम,,
मेरे साजन की छाया हो, मेरी चोखट का श्रृगांर हो तुम ।

#सचिन राणा हीरो

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।