इंतज़ार है तुम्हारा

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kaji
बहारें इंतज़ार करती,ग़ुलों के खिलखिलाने का ।
हमें भी इंतज़ार है अब, तुम्हारे मुस्कुराने का ।।
तुम्हारे नाम है मेरी ये सारी ज़िंदगानी ।।।
हमें तो शौक है तेरी, बांहों में बिखर जाने का ।।।।

मेरा दिल तो हरदम यूं, तुम्हारा नाम लेता है ।
चाहत की हसीं राहों पर, तुम्हें आवाज़ देता है ।।
दिल तो बहाना ढूंढता है,ख़ुद को मनाने का ।।।
हमें भी इंतज़ार है अब, तुम्हारे मुस्कुराने का ।।।।

घटाओं की तरह तू क्यों ,ऐसी अंगड़ाई लेती है ।
मुझे हर सिम्त मेरी जानम,तू क्यों दिखाई देती है ।।
अभी भी ऐतबार है मुझको, तेरे लौट आने का ।।।
हमें भी इंतज़ार है अब, तुम्हारे मुस्कुराने का ।।।।

जला कर इश्क़ की आतिश में,मेरा इम्तिहान लेती है ।
ये दुनिया प्यार में दीवानों को,
हर दम दर्द देती है ।।
मिटा कर ग़िले दिल करता है, तेरे पास आने का ।।।
हमें भी इंतज़ार है अब, तुम्हारे मुस्कुराने का ।।।।

#डॉ.वासीफ काजी

परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत डॉ. वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन काजी ने हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है,साथ ही आपकी हिंदी काव्य एवं कहानी की वर्त्तमान सिनेमा में प्रासंगिकता विषय में शोध कार्य (पी.एच.डी.) पूर्ण किया है | और अँग्रेजी साहित्य में भी एमए कियाहुआ है। आप वर्तमान में कालेज में बतौर व्याख्याता कार्यरत हैं। आप स्वतंत्र लेखन के ज़रिए निरंतर सक्रिय हैं।

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।