इंतज़ार है तुम्हारा

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kaji
बहारें इंतज़ार करती,ग़ुलों के खिलखिलाने का ।
हमें भी इंतज़ार है अब, तुम्हारे मुस्कुराने का ।।
तुम्हारे नाम है मेरी ये सारी ज़िंदगानी ।।।
हमें तो शौक है तेरी, बांहों में बिखर जाने का ।।।।

मेरा दिल तो हरदम यूं, तुम्हारा नाम लेता है ।
चाहत की हसीं राहों पर, तुम्हें आवाज़ देता है ।।
दिल तो बहाना ढूंढता है,ख़ुद को मनाने का ।।।
हमें भी इंतज़ार है अब, तुम्हारे मुस्कुराने का ।।।।

घटाओं की तरह तू क्यों ,ऐसी अंगड़ाई लेती है ।
मुझे हर सिम्त मेरी जानम,तू क्यों दिखाई देती है ।।
अभी भी ऐतबार है मुझको, तेरे लौट आने का ।।।
हमें भी इंतज़ार है अब, तुम्हारे मुस्कुराने का ।।।।

जला कर इश्क़ की आतिश में,मेरा इम्तिहान लेती है ।
ये दुनिया प्यार में दीवानों को,
हर दम दर्द देती है ।।
मिटा कर ग़िले दिल करता है, तेरे पास आने का ।।।
हमें भी इंतज़ार है अब, तुम्हारे मुस्कुराने का ।।।।

#डॉ.वासीफ काजी

परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत डॉ. वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन काजी ने हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है,साथ ही आपकी हिंदी काव्य एवं कहानी की वर्त्तमान सिनेमा में प्रासंगिकता विषय में शोध कार्य (पी.एच.डी.) पूर्ण किया है | और अँग्रेजी साहित्य में भी एमए कियाहुआ है। आप वर्तमान में कालेज में बतौर व्याख्याता कार्यरत हैं। आप स्वतंत्र लेखन के ज़रिए निरंतर सक्रिय हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।