तेरी बेवफ़ाई के किस्से मेरे अश्क कहते हैं । तेरी याद में ये मोती हरदम यूं ही बहते हैं ।। न ही तु ज़िन्दगी में ,न तेरा नाम बाक़ी है ।।। तेरा नाम का दीवाना अब मुझको लोग कहते हैं ।।।। तेरे बिन शीशमहल भी अब वीराना लगता है । […]

नहीं मिलती कहीं से अब तो ख़बर तेरी । तेरी मोहब्बत के सफ़र में है ज़िन्दगी मेरी ।। चाहतें दिल की ये अरमान तेरे लिए हैं ।।। ख़ुद में खुद को ढूंढ रही ज़िन्दगी मेरी ।।।। अहसास बेज़ुबान होते हैं दिल के यारा । उसकी नज़रों में जगह ढूंढ रही […]

तेरी ख़ुशबू से महक़ रहा हूँ आजकल । ये तेरा इश्क़ संदल से कम नहीं ।। मिल जाये अगर साथ तेरा तो ।।। ज़माने का मुझको गम नहीं ।।।। महसूस हो रही है रईसी आजकल । ये तेरी चाहत दौलत से कम नहीं ।। मशहूर हो गया हूं तेरे इश्क़ […]

पहरेदार है अडिग हिमालय , गंगा जिसकी आत्मा है । क़ाबा से कैलाश तक यहां, कण कण में परमात्मा है ।। जिसकी संस्कृति महान है । ये मेरा हिंदोस्तान है ।। अहिंसा की तपोधरा है , भंडार रत्नों से भरा है । पावन भूमि ऋषियों की, दिन रात जिन्होंने जप […]

मुझे मोहब्बत तुम्हीं से है बस ।ये दिल धड़कता तेरे लिए है ।।तू ही है बस एक सुकून दिल का ।।।ये ज़िस्म सिसकता तेरे लिए है ।।।। तुम्हीं से ख़ुशबू ग़ुलों में है बस ।ये दिन निकलता तेरे लिए है ।।तुम्हीं से रोशन बहार मुझमें ।।।ये दिल धड़कता तेरे लिए […]

हाथों में हाथ थामे, साथ मेरे तुम चलना । मेरे जीवन के आंगन में, सांझ जैसी ढलना ।। उम्मीदों का सहर हो मेरी, तुम ही उजाला करना । बारिशों का पानी बनकर, यूं ही तर-बतर करना ।। अच्छा लगता है मुझको यूं खुद से बातें करना । याद में तेरी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।