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kavita vani
पहला पल, पहली घड़ी
माँ का आँचल थामा था
अजीब सी अनुभूति थी
माँ ने भी यह माना था
भुला दी तकलीफें सारी
अभी-अभी माँ ने झेली थी
सकूँन का वह पल था
झोली में खुशियाँ खेली थी
छलक पड़े आँसू भी
नयन जो कल सूखे थे
फुट पड़ी दूध की धारा
आँचल से, कल जो रूखे थे
तन पर  वस्त्र नहीं
पल्लू से माँ ने ढक दिया
लगा काजल की टिकिया
नन्हें का माथा चुम लिया
पाया माँ ने स्पर्श
कितना सूखद पल था
नन्हा हो या नन्ही हो
गोदी में माँ की कल था
अनवरत बहतें आँसू
आँखे पूरी धूल गई
पाकर स्पर्श,माँ नन्हे का
जन्नत को भी भूल गई
माँ होने का एहसास
किस्मत वालो को होता है
माथा टेको दर-दर पर
तब गोदी में बच्चा रोता है
कहती हूँ मैं,जितनी जल्दी
भुना लो इस पल को
आधुनिकता की दौड़ में
मत भुलाओ कल को
#कविता धनराज वाणी
परिचय-
1.श्रीमती कविता वाणी 
   प्राचार्य कन्या शिक्षा परिसर
    जोबट विकास खण्ड
     जोबट जिला-अलीराजपुर
(मध्यप्रदेश)
     (मूल निवास जोबट)
       जन्म स्थान- जोबट
 पति का नाम -धनराज वाणी 
   शिक्षक व कवि (वीर रस)
2.शिक्षा-एम.ए.बी.एड.  
     (समाजशास्त्र/अंग्रेजी)
3.रुचि-साहित्य व रचनाकार 
   गीत व कविताओं की रचना
   महिला सशक्तिकरण पर   
     विशेष….
4.उपलब्धियां-आकाशवाणी
    इंदौर से अनेको बार काव्य
     पाठ किया व साहित्यिक
      मंचो का संचालन भी
       किया
5.बचपन से साहित्य व    
       लेखन में रुचि
 
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