सपने

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nisha raval

इन पलकों में हजारों ख्वाहिशों का बोझ लिए ,,,सपनो को जीना कितना सुखद होता है,,दिन भर निरंतर कोशिश करते रहना,,,और रात को उन कोशिशों को इन पलकों में सजाकर ख़्वाब की ओर नींद की आगोश में चले जाना,,,,कि अगली सुबह वो जरूर पूरे होंगे,और न भी हुए तो क्या गम,फिर से कोशिश तो जिंदा है न ,हौसले अभी बाकी है न,बशर्ते कोई नकारात्मक बातो का आवरण हमारे हौसलों में ढंकने की कोशिश न करे,,दुनिया मे कम ही लोग होते है जो हमारे किसी कार्य मे सकारात्मक बाते करके हमे हौसला दे जाए,,वो तो अक्सर हमारे हौसले तोड़ने की  कोशिश में ही लगे रहते,,,लेकिन फिर भी हमारी जिंदगी में एकाध तो निश्छल हृदय वाला एक ऐसा शख्श भी होता है,, जो हमे और हमारे सपनो को निरंतर ऊंचाइयों में देखना चाहता है,और बाकी तमाम लोगो की नकारात्मकता और विरोध के बावजूद सकारात्मक दृष्टि से हमारा मोरल सपोर्ट भी करता रहता है,,,ये वही है जो हकीकत में और हर हाल में हमे खुश देखना चाहता है,,,कुछ अपने चाह कर भी मजबूरी वश हमारा सपोर्ट नही कर पाते,यहां तक वो इतने मजबूर हो जाते है या मजबूरी का दिखावा करते है कि अपनी बोली से हमारा मनोबल तक नही बढ़ा पाते,,और कुछ जो हकीकत में हमसे प्रेम करते है,,,किसी की परवाह किये बिना ही हमारे साथ-साथ चलते रहते हैं ,,,सपने तो हम देखते हैं,, उन्हें दिन रात हम जीते हैं,, उसके लिए कड़ी मेहनत भी हमे ही करनी होती है, पर गर ऐसे में हमारी जिंदगी में कोई हमारा मनोबल बढ़ाने वाला,हमारे सपनो के प्रति सकारात्मक सोच रखने वाला,,और हमे भावनात्मक रूप से सपोर्ट करने वाला शख्श मिल जाये तो उससे बेहतर कुछ भी नही हो सकता,,बस लगता है राह में कितने भी रोड़े आये अगर हम डगमगा भी गए तो वो शख्श तो हमारा मनोबल बढ़ायेगा और हम फिर वापस अपने सपनो को साकार करने अडिग हो जाएंगे,,,ऐसे दिल के अमीर एकाध शख्श हर किसी की जिंदगी में शायद होते ही होंगे,,और हम उन्हें पहचान नही पाते या पहचानने में देर कर देते है,,, क्योंकि हमारे मन मे एक भ्रम होता है कि हमारे सगे और खून के रिश्ते ही हमारे सपनो के प्रति सटीक और सकारात्मक दृष्टिकोण रख सकते है,, वो जो बोलेंगे या सोचेंगे हमारे लिए सही ही होगा,,, भले वो हमारे हित मे बिल्कुल भी सही नही है,,लेकिन हमेशा ऐसा नही होता और एक दिन अचानक ये भ्रम टूट जाता है,, जिनसे अब तक उम्मीद की ये बखूबी मुझे समझते है,,, असल मे वो समझ ही नही पा रहे थे,,लेकिन दूर बैठा एक शख्श जो दूर से ही ये सारे क्रियाकलापों को देखता रहता है,, हमारे मन की पीड़ा देख और समझ रहा होता हैं, उसने हमेशा हमारे सपनो को समझा और सकारात्मक दृष्टिकोण भी रखा लेकिन हम उसे कभी समझ ही नही पाए कि वो हमारे लिए सही है ,क्योंकि उससे हमारा खून का रिश्ता ही नही है,,,शायद कितने गलत थे हम,,,जो अब तक एक खूबसूरत भ्रम में जी रहे थे….!!

#निशा रावल
   छत्तीसगढ़

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।