आदिशक्ति देवी दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि

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बड़ा भयंकर रूप बनाया
कालरात्रि रूप कहाया

नासिका से अग्नि बरसे
असुर सारे थर थर कांपे

रक्तबीज का नाश करती
कालरात्रि माँ कहलाती

वरमुद्रा से माँ आशीष देती
भक्तों की झोली भर देती

रूप भले लगता हो भयंकर
लेकिन माँ तो है शुभंकारी

वीरता साहस का प्रतीक माँ
कालरात्रि माँ बन जाती

धरा पर रक्त गिरने न दिया
रक्तबीज को मार गिराया

सुख वैभव सारे ही देती
जो करता मन से है भक्ति

रौद्री भी कालरात्रि कहलाती
धुमोरना देवी भी माँ कहाती

गर्दभ वाहन पर करे सवारी
माता पड़ती असुरों पर भारी

एक हाथ मे तलवार ले चलाती
असुरों का वध तुरन्त ये करती

शिवजी जिनके जीवन साथी
शिव महिमा अहर्निश गाती

पापों विध्नों को माँ हर लेती
अक्षय पुण्य लोक माँ देती

भय सारे मन से भगाती
अभयदान कालरात्रि ही देती

स्मरण ध्यान पूजा जो करते
कालरात्रि मनचाहा फल देती

डॉ. राजेश पुरोहित

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।