दर्पण 

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alok tripathi
मन दर्पण को स्वच्छ बना लू जीवन की शंध्या से पहले।
परम पिता को मै अपना लू जीवन की शंध्या से पहले।।
आपा धापी दौड धूप चलती रहती है।
आशा तृष्णा सदा हृदय कलुषित करती है।।
सुबह शाम शंध्या रात्री के प्रहर बीतते
संकल्पों मे ब्यथित सदा  होकर हम रहते।
 हरि सुमिरन के गीत सुना लू जीवन की शंध्या से पहले ।।
परम पिता ,,,,,,,
अंतरज्वाला धधक रही है इसे बुझा दू।
बहती हुइ नाडियों मे भक्ती की राग बहा दू।।
प्रेम और करूणा से भर लू हृदय पटल को।
जन्मों से संचित पापों को आज मिटा दू।।
मन मंदिर को मै महका दू जीवन की शंध्या से पहले।।
परम पिता ,,,,,,,,,,,
निर्भयता की सीढीमै चढता जाऊ मै ।
दृढता से जीवन पथ पर मै चलता जाऊ ।।
आत्मोन्नति पर सतत बढू उत्साहित होकर ।
सभी विकारों के चंगुल से छुटता जाऊ ।।
सत्चरित्र को हार बना लू जीवन की शंध्या से पहले ।।
परम पिता ,,,,,,,
#आलोक त्रिपाठी 
शास्त्री साहित्याचार्य
एम ए हिन्दी लिट्रेचर
इंदौर ,मध्यप्रदेश
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।