स्याही और सौगंध

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aashutosh kumar
सौगंध मुझे इस स्याही की,
मैं कलम न रूकने दूँगा
ठेस न पहुँचे दिलों को
वो शब्द न लिखने दूँगा
मैं दिलों को न बँटने दूँगा।

सभी को आए ज्ञान
शब्द का रखूंगा ध्यान
वो चिंगारी अहंकार की
न पनपने दूँगा
सौगंध मुझे इस स्याही की,
मैं कलम न रूकने दूँगा।

चिंगारी देश प्रेम की
बरकरार रहे दिलों में
सभी मजहब आबाद रहे यूँ ही
कसम खाता हूँ
अनेकता न बढ़ने दूँगा
सौगंध मुझे इस स्याही की,
मैं कलम न रूकने दूँगा।

सभी का सम्मान करे
दिलो पर राज करे
शब्दों के वाणो से ना प्रहार करे
ऐसे शब्द न कहने दूँगा
सौगंध मुझे इस स्याही की,
मैं कलम न रूकने दूँगा।

थक गया गर कभी
शब्दो को पढ़ लूँगा
मान सम्मान और मर्यादा
पाकर नई ऊर्जा शब्दों की
नई चेतना का गुनगान करूँगा
सौगंध मुझे इस स्याही की,
मैं कलम न रूकने दूँगा।

खोकर अपना ईमान-घर्म
चोर चाटुकारो के संग
भ्रष्ट तंत्र और घूसखोरो से
तंग होकर न पथ से हटूँगा
सौगंध मुझे इस स्याही की,
मैं कलम न रूकने दूँगा।

जब जब आए मुश्किल वक्त
एकता की शक्ति से प्रहार करूँगा
जात पात और आतंकबाद
ना बर्दाश्त करूँगा
सौगंध मुझे इस स्याही की,
मैं कलम न रूकने दूँगा
ठेस न पहुँचे दिलों को
वो शब्द न लिखने दूँगा
मैं दिलों को न बँटने दूँगा।

“आशुतोष”

नाम।                   –  आशुतोष कुमार
साहित्यक उपनाम –  आशुतोष
जन्मतिथि             –  30/101973
वर्तमान पता          – 113/77बी  
                              शास्त्रीनगर 
                              पटना  23 बिहार                  
कार्यक्षेत्र               –  जाॅब
शिक्षा                   –  ऑनर्स अर्थशास्त्र
मोबाइलव्हाट्स एप – 9852842667
प्रकाशन                 – नगण्य
सम्मान।                – नगण्य
अन्य उलब्धि          – कभ्प्यूटर आपरेटर
                                टीवी टेक्नीशियन
लेखन का उद्द्श्य   – सामाजिक जागृति

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।