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sanjay
जब से मिली है, तुम से नजरे ।
तब से न जाने, क्या हो गया ।
अब तो आँखे भी, शर्मा ने लगी  ।
किसी और से , नजरे मिलाने को।।
तेरे इंतज़ार में, एक उमर हो गई ।
रात रुक सी गई, और सहर हो गई ।
पता नहीं अब, कब मुलाकात होगी ।
नज़रों की नजरो से, कब बात होगी ।।
तेरी बेरुखी का अब , हम गिला क्या करें ।
 इन निगाहों से, सबको खबर हो गई ।
किस किस को, बताये अब हम ।
की हमे सच में, मुहब्बत हो गई ।।
फूलों की सुगंध, जैसी तुम  महकती हो ।
तारो की तरह, तुम चमकती हो ।
अब तो ह्रदय के, द्वार खोल दो ।
दिल को दिल से,मिलने के लिये।।

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

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