पूछो न हाल 

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dhirendra
किसकी नजर लगी
इस देश को मेरे दोस्तों
शाम तो शाम
सुबह भी काली है दोस्तों ॥
इंसानियत सो रही
हैवानियत जागी है दोस्तों
युवा तो युवा
बूढ़े भी बवाली हैं दोस्तों ॥
किसी का नहीं भरोसा
सब जालिम है दोस्तों
पराये तो पराये
अपने भी बने रुदाली हैं दोस्तों ॥
सफेदपोशों का पूछो न हाल
खुद में ही उलझे हैं दोस्तों
पक्ष या विपक्ष
नेता बने गाली हैं दोस्तों ॥
कमाता है कोई
कोई लूटता है दोस्तों
देखकर भी सब
बजाते सिर्फ ताली हैं दोस्तों ॥
धर्म , संस्कृति की बातें
सब भूले हैं दोस्तों
मन तो मन
जबान भी खाली है दोस्तों ॥
नारी मर्यादा की सोंच
किताबों की शोभा है दोस्तों
दोस्त तो दोस्त
हमसफ़र भी जाली है दोस्तों ॥
मानव की प्रकृति
विकृत हुई है दोस्तों
माँ तो माँ
धरा भी बनी सवाली है दोस्तों ॥
अंधेरे की कहानी
सिर्फ गाओ न दोस्तों
काम तो काम
बात भी न ख्याली हो दोस्तों ॥
बहुरेंगे दिन
जो सोंच ले दोस्तों
दूर करो खुद से
नाउम्मीदी जो पाली है दोस्तों ॥
#आचार्य धीरेन्द्र झा 
परिचय-
संस्कृत साहित्य से आचार्य वर्षों से कविता लेखन में रत है। रचनाओं में शृंगार रस की प्रधानता होती है । प्रसाद साहित्य परिषद , हिन्दी साहित्य सम्मेलन एवम् कला संगम संस्थाओं से जुड़े है।
प्रखंड -रुन्नी सैदपुर 
सीतामढी , बिहार 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।