विनती

Read Time0Seconds
rambahadur
विनती करूं शीश नवाय के सुनो शारदे मांय,
लिखने में यदि भूल हुई हो, शीघ्र दीजे बताय,

शीघ्र दीजे बताय मेरी कविता हो अति सुन्दर,
अवगुण न होवे कभी इस कविता के अन्दर,

लिखे अकेला “दास”, अब आप ही हैं रक्षक,
विनती करूं हे मां! सहारा हों बन के तक्षक,

बक्सर पास सुरसरि, वहीं सुंदर एक धाम,
ताहि पश्चिम बसे भरौली,वही मेरो है गांव ,

उत्तर-पछिम है सिद्ध पीठ महादेव स्थाना,
दक्षिण छोर मां मंगला भवानी को जगजाना,

वहीं रहत हैं हम, नाम नहीं है जाना पहचाना,
इसीलिए अकेला नाम हमें पड़ा है अपनाना,

#राम बहादुर राय “अकेला”
एम.ए.(हिन्दी, इतिहास ,मानवाधिकार एवं कर्तव्य, पत्रकारिता एवं जनसंचार),बी .एड.
मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार,
बलिया (उत्तर प्रदेश)
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

राम-मन्दिर

Mon Jan 21 , 2019
राम नाम की घून पर अंधकार की धूँध । ज्ञान की कमी नही फिर क्यों फूट ? हर ओर अशांति की क्यों है छूट ? मर्यादा पुरूषोत्तम के देश में मनबढू की क्यों हो रही पूछ ? जिनके नाम से उद्धार है काया उनके ही घर पर क्यों अंधकार छाया […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।