जब मधुर सुहानी भोर हो

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ragini swarnkar
प्राची में बिखरे कुंकुम,
रतनार नयन मन हो जाये !
आलोकित उर अर्णव मुख ,
तम तोम सहमकर रह जाये !!
भोर कटोरी ,हो मधु  बोरी
सुरभित अम्बर छोर हो !
जब मधुर सुहानी भोर हो !!!
आशाओं की विकसे कलियाँ,
उत्साह उरों में मुस्कुराये !
खग -कुल कुल -कुल बोल उठे
नयन विहाग से अलसाये  !
अम्बर के पनघट में जब,
ऊषा देती तारक घट बोर हो !
जब मधुर सुहानी भोर हो !!!
ऊषा अंशुक शुभग शुभंकर,
स्वर्णिम आभा बिखराये ।
होले -होले उतर अवनि पर,
इठलाती क्षिति से आये ।।
रश्मिरथी सी उजली उजली
विश्वासों की डोर हो !
जब मधुर सुहानी भोर हो !!
#रागिनी स्वर्णकार(शर्मा )
वर्तमान पता- इंदौर(मध्यप्रदेश )
राज्य- मध्यप्रदेश
शहर- इंदौर
शिक्षा- बी.एस-सी.,एम.ए.(हिन्दी साहित्य,इंग्लिश लिटरेचर),एम.एड. , शोधकार्य रत 
कार्यक्षेत्र- व्याख्याता हिन्दी
विधा – गीत,ग़ज़ल,मुक्तक,छंद,अतुकांत,
प्रकाशन- 
1-काव्यसंग्रह -प्राण ढाल दो ज़िन्दगी में ( मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य अकादमी  भोपाल ) द्वारा 
2-बेटियां (अंतरा शब्दशक्ति प्रकाशन)
सम्मान- 1.श्रेष्ठ युवा कवियत्री सम्मान, 
2 हिन्दी सागर सम्मान (विश्वहिंदी रचनाकार मंच दिल्ली द्वारा )
2. वुमन आवाज सम्मान 2018 (वुमन आवाज औऱ अंतरा शब्दशक्ति द्वारा )
3.शीर्ष परिषद भोपाल द्वारा सम्मानित 
4 साहित्य संगम इंदौर द्वारा सम्मानित
ब्लॉग-  रागिनी शर्मा एक अभिव्यक्ति
अन्य उपलब्धियाँ- शिक्षा जगत में अनेक उपलब्धियां
शालेय पत्रिका संकल्प का सम्पादन 9 वर्ष से । 
लेखन का उद्देश्य- सकारात्मक विचारों की अभिव्यक्ति ,वास्तविक प्रकाश हमारे अंदर विद्यमान है सृजन का प्रकाश ,इसी प्रकाश से अँधेरों से लड़ने की एक कोशिस !!!

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।