जिन्दगी की विवशता

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aashutosh kumar
आज स्वतंत्रता के बहत्तर साल हो गये,
फिर क्यों कड़ाहती है जिन्दगी,
कहीं सिसकते मासूम तो,
कहीं अबलाओं की दुसवार है जिन्दगी,
कहीं लाचार तो,कही रफ्तार है जिन्दगी,
कहीं भूख तो, कही लूट है जिन्दगी,
कहीं द्वेष तो, कही फरेब है जिन्दगी,
कहीं योग्यताएँ भरमार है, पर वेरोजगार है जिन्दगी,
कहीं कानून पर्याप्त है फिर क्यों न्याय को लाचार है जिन्दगी,
कहीं एकता है तो, कहीं अनेकता से भेद-भाव है जिन्दगी,
कहीं मिलन है तो,कहीं जुदाई से लाचार है जिन्दगी,
कहीं भीड़ है तो, कहीं सुनसान है जिन्दगी,
कहीं कलह है तो,कहीं शांत है जिन्दगी
कहीं रोग है तो कहीं आरोग्य है जिन्दगी,
कहीं आतंक है तो,कही व्यवहार है जिन्दगी,
कहीं आराम है तो, कहीं काम है जिन्दगी,
कहीं हवस है तो कहीं प्यार है जिन्दगी,
कहीं वैराग्य है तो, कहीं योग है जिन्दगी,
कहीं रोशनी है तो, कहीं अन्धेरा है जिन्दगी,
योजनायें तो, भरमार है फिर भी सड़को पर सोती हैं जिन्दगी।

“आशुतोष”

नाम।                   –  आशुतोष कुमार
साहित्यक उपनाम –  आशुतोष
जन्मतिथि             –  30/101973
वर्तमान पता          – 113/77बी  
                              शास्त्रीनगर 
                              पटना  23 बिहार                  
कार्यक्षेत्र               –  जाॅब
शिक्षा                   –  ऑनर्स अर्थशास्त्र
मोबाइलव्हाट्स एप – 9852842667
प्रकाशन                 – नगण्य
सम्मान।                – नगण्य
अन्य उलब्धि          – कभ्प्यूटर आपरेटर
                                टीवी टेक्नीशियन
लेखन का उद्द्श्य   – सामाजिक जागृति

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।