कर्त्तव्य बोध

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ashok kumar dhoriya
हलकू हर किसी काम को दरकिनार करता रहता था।वह केवल अपने अधिकार के बारे जानता था। कर्त्तव्य की बात आते ही वह पूरा वकील बन जाता था।
               एक बार गाँव में आधार कार्ड बनाने वाले आ गए।आधार कार्ड निःशुल्क बनाए जा रहे थे। हलकू ने वहाँ जाकर देखा तो दस पन्द्रह लोगों की लाइन लगी थी। लाइन को देखकर वह बोला-“इतना लंबा इंतज़ार कौन करेगा? किसी को वोट की जरूरत होगी तो अपने आप बनवाएगा।” ऐसा कहकर वह तास खेलने चला जाता है।
                     जब सरकार ने प्रत्येक सरकारी योजना के लिएआधार कार्ड अनिवार्य कर दिया तब हलकू ने दौड़ धूप शुरू की। बाद में आधार कार्ड बनवाने के लिए हलकू ने फीस भी देनी पड़ी और काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
                  इस लघुकथा से यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने अधिकारों के साथ साथ अपने कर्त्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करना चाहिए।
परिचय:-
अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)
हरियाणा
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।