आगमन

3
Read Time2Seconds

ujwal

तुम्हारे सारे दुख लेकर मैं खुशियाँ देने आया हूँ,
मैं ऐसा हूँ या वैसा हूँ, बस तेरा होने आया हूँ।

इक उम्र ने मुझको भी खुशियाँ भरपूर ही दे डालीं,
खुशियों को सब इकट्ठा कर तुम पे लुटाने आया हूँ।
मैं ऐसा हूँ या वैसा हूँ …॥

तुम वो पाकीज़ा मूरत हो जिसने खुशियाँ ही सबको दीं,
तुम्हारे मन के मन्दिर में इक दीप जलाने आया हूँ।
तुम्हारे सारे दुख लेकर…॥

खूबसूरत मुझको लगती हो तुम जग में सबसे सुंदर हो,
तुम्हें लगे न नज़र किसी की, नज़र उतारने आया हूँ।
मैं ऐसा हूँ या वैसा हूँ…॥

चाँद-सितारों ने मुझको रोका बहुत था हाथ पकड़,
तुम्हारे वास्ते सूरज भी अब ठुकरा के आया हूँ।
तुम्हारे सारे दुख लेकर…॥

ये क्यों उलझे से बाल हैं,ये रंग पे कैसे सवाल हैं,
मैं पावन अनुपम रंगों से तुमको सजाने आया हूँ।
तुम्हारे सारे दुख लेकर…॥

बहुत हुआ इकतरफा रब का सारे दुख तुमको देना,
मैं रब से लड़कर आया हूँ,मैं रब से रूठकर आया हूँ।
तुम्हारे सारे दुख लेकर…॥

प्यार तुम्हीं से है मुझको,तुम भी तो बस मेरी हो,
आज सीरत की मोहब्बत सबको दिखाने आया हूँ।
मैं ऐसा हूँ या वैसा हूँ…॥

क्या कहा तुमने मुझसे कि जाने नहीं दोगे मुझको,
खुश हो जाओ मैं आज यहाँ खुद को छोड़ने आया हूँ।
तुम्हारे सारे दुख लेकर…॥

पलकों पर आँसू के सागर पहरा डाल के बैठे हैं,
मैं तुम्हारी पुरनम आँखों से आँसू पोंछने आया हूँ।
तुम्हारे सारे दुख लेकर…॥

तुम्हारे सामने सारी बातें शायद ‘वशिष्ठ’ ना कह पाता,
इसीलिए एक कागज़ पर गज़ल ये लिख कर लाया हूँ।
मैं ऐसा हूँ या वैसा हूँ…॥

                                                          #उज्ज्वल वशिष्ठ
परिचय : वर्तमान में छात्र जीवन जी रहे उज्ज्वल वशिष्ठ की जन्मतिथि-१ जुलाई १९९७ और जन्म स्थान-सम्भल है। आप राज्य-उत्तरप्रदेश के शहर-बदायूँ में रहते हैं। स्नातक और एल.एल.बी. कर चुके श्री वशिष्ठ अभी सिविल परीक्षा की तैयारी में लगे हुए हैं। सामाजिक क्षेत्र में जागरुकता अभियान चलाते हैं। गीत, ग़ज़ल और नज़्म लिखना पसंद है। लेखन का उद्देश्य-मन की भूख को शान्त करना और हर काव्य में एक संदेश छोड़ के लोगों को जागरूक करना है।
0 0

matruadmin

3 thoughts on “आगमन

  1. उत्कृष्ट शब्दों का अद्भुत चयन
    शुभकामनाएं बहुत बहुत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

तेरी मधुशाला 

Fri Nov 10 , 2017
बना लो तुम मुझे अपनी मधुशाला, आऊँगी जब कभी तुम आवाज़ दोगे। प्यार के रस की चासनी छलकाती हूँ, नशा आँखों से बरसाती हुई… बिना जाम पिए तुम मधहोश हो जाओगे, गिरकर मेरी बाँहों में संभल जाओगे॥ दिन दोपरिया रात संवरियाँ, सजा दूँगी तुम्हारी मोहब्ब़त की महफ़िल… ध्यान रखना तुम्हारे […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।