*फिर से जगाने आई हूँ*

0 0
Read Time3 Minute, 15 Second
vandana sharma
आज मेरे गाँव की सूरत दिखाने आई हूँ
खोई हुई पहचान से परिचय कराने आई हूँ।
साफ सुथरे गाँव में हरियाली का विस्तार था
प्रेम से रहते सभी अपनत्व का प्रचार था।
गाँव की चौपाल पर ज्ञान की बातें सदा
धर्म भक्ति यज्ञ में विश्वास करते सर्वदा।
दुःख दर्द में तन मन लगा सेवा में तत्पर थे सभी
लोभ लालच ईर्ष्या का भाव देखा न कभी।
घी दूध की नदियाँ यहाँ सदियों से बहती आई हैं
माँ बहन बेटी सदा बेखौफ रहती आई हैं।
गाँव के युवा सदा से हष्ट पुष्ट बलवान थे
शिक्षा और किसानी में निपुण बड़े गुणवान थे।
हर घर से कोई ना कोई सेना में तैनात थे
दया धर्म और मानवता के इनमें भरे जज्बात थे।
लेकिन हाय!तस्वीर पुरानी हो गयी इस गाँव की
पहचान थी सबसे अलग वो खो गयी इस गाँव की।
दूध के रिश्तों का भी अब खून पानी हो गया है
दागकर भाई पे गोली आज भाई भी हैवानी हो गया है।
अश्लीलता, असभ्यता का बहुत प्रचार हो गया है
गाँव का युवा नशे की व्याधियों में फंस गया है ।
घृणा, ईर्ष्या, वैरभाव को जड़ से मिटाने आई हूँ
सोये हुए इस गाँव को फिर से जगाने आई हूँ।
आज मेरे गाँव**********
खोई हुई पहचान *******
उठो जागो नींद से अब लक्ष्य की खेती करो
सींच दो संस्कार सारे ज्ञान की ज्योति भरो।
थाम कर हर हाथ को फिर एकमत होकर बढ़ो
कामयाबी के अनूठे इतिहास नित नूतन गढो।
अल्प लाभ पाने खातिर जो नशा कैंसर बेच रहे
छोड़ दो यह व्यापार वन्दना घुटने अपने टेक रही।
नशा नहीं तुम बेचोगे न बेचने वाला आएगा
उसदिन मेरा गाँव असल में नशा मुक्त बन पाएगा।
बड़ों को कर नमस्कार, मस्तक तिलक लगाओगे
दया,धर्म मन मे रखकर आगे बढ़ते जाओगे।
फैला अँधेरा गाँव में दीया जलाने आई हूँ
सोये हुए इस गाँव को फिर से जगाने आई हूँ
#वन्दना शर्मा
अजमेर(राजस्थान)
मेरा नाम वन्दना शर्मा है मैं अजमेर से हूँ मेरा जन्म स्थान गंडाला अलवर है मेरी शिक्षा हिंदी में स्नातकोत्तर बी एड है मेरे आदर्श मेरे गुरु और माता पिता हैंलेखन और पठन पाठन में मेरी रुचि है नौकरी के लिए प्रयास रत हूँ। मेरी रचनाएँ  कई पोर्टल पर प्रकाशित होती हैं मैं कई  काव्य समूहों में सक्रिय हूँ । अभी मैं मातृभाषा पोर्टल से जुड़ना चाहती हूँ पोर्टल के नियमों के प्रति प्रतिबद्धता मेरी प्रतिज्ञा है वन्दन 

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सन्तान

Sun Oct 21 , 2018
जीते जी जो सेवा करते माता पिता का हर ध्यान जो रखते उनकी हाँ में हाँ मिलाते बड़े होने पर भी आंख न मिलाते अच्छी होती वह संतान मरने के बाद भी जो स्मरण करते उस संतान की अनूठी शान माता पिता के जो पथानुगामी बनते यशस्वी होती ऐसी सन्तान […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।