नहीं पता अब है वंदे का..

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satish tiwari

एक ज़माना वो भी देखा एक ज़माना ये भी,
पहले प्रेम रहा,डरने का एक ज़माना ये भी!
०००
जब वह आते गाँव हमारे निज कुटिया तक आते,
नहीं पता अब है वंदे का एक ज़माना ये भी!
०००
पहले आस्था पर था केन्द्रित दुर्गा जी का चंदा,
रूप लिया जिसने धंधे का एक ज़माना ये भी!
०००
गाँव में बनता था गुड़ पहले छककर हम थे खाते,
दाम मिले न अब गन्ने का एक ज़माना ये भी!
०००
‘सरस’ वाटियाँ-भर्त थे हम-सब हिल-मिलकर के खाते,
नाम न दिखता अब कंडे का एक ज़माना ये भी!

जीवनवृत

*सतीश तिवारी ‘सरस’

पिता -स्व. श्री सत्यनारायण तिवारी 
जन्मतिथि -26 जनवरी
जन्म स्थान -ग्राम-मोहद,तहसील-करेली,जिला-नरसिंहपुर (म.प्र.)

शिक्षा-एम.ए (समाजशास्त्र,हिन्दी साहित्य),बी.एड्.,बी.सी.जे.,पी.जी.डी.सी.ए.

सम्प्रति-हिन्दी अतिथि शिक्षक (वर्ग-1)
अध्यक्ष,साहित्य सेवा समिति,जिला-नरसिंहपुर/जिलाध्यक्ष,राष्ट्रीय हिन्दी सेवा समिति

प्रकाशित कृतियाँ-(1)हाशिये पर ज़िन्दगी (ग़ज़ल संग्रह),(2)ख़त लिखे जो प्यार के (ग़ज़ल संग्रह)(3)जाने कौन..?(ग़ज़ल संग्रह),(4)नाते निभते नेह से (दोहा-कुण्डलिया संग्रह)

प्रकाशन की राह में- 1.प्रेम पिपासा (गीत संग्रह)
2.सपना (लघुकहानी संग्रह),3.क्योंकि मैं नहीं चाहता (कविता संग्रह),4.तुलसी-सरसांजलि (कुण्डलिया संग्रह)
5.कबीर-सरसांजलि (कुण्डलिया संग्रह)

प्रसारण-आकाशवाणी जबलपुर से रचनायें प्रसारित

सम्पादन-‘अक्षर साधक’ (नरसिंहपुर जिले के91 कवियों का संयुक्त काव्य संग्रह),’प्रवाह'(उभरते सात कवियों का काव्य संग्रह),’प्रेरणा’मासिक (लघु पत्रिका),’प्रवाह’-2′ (9 कवियों का काव्य संग्रह),’भाव-सम्पदा'(‘काव्य अंज़ुमन’ व्हाट्सऐप संदेश पटल का आयोजन,काव्य संग्रह),’काव्य सुधा’ (संयुक्त काव्य संग्रह)

सम्मान-विविध संस्थाओं द्वारा सम्मानित

विशेष-1.वर्ष 1999 में दिल्ली में आयोजित 15 वें दलित साहित्यकार सम्मेलन में दिये जाने वाले डॉ.अम्बेडकर फेलोसिफ़ सम्मान हेतु बुलाया गया था किन्तु किसी कारणवश न पहुँच सके।
2.मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित प्रतिभा खोज प्रतियोगिता के अंतर्गत साहित्य की कविता विधा में ब्लाक,जिला व संभाग स्तर पर चयनित होने के उपरांत 24 फरवरी 2016 को उज्जैन में रखी गयी राज्योत्सव प्रतिभा खोज-2016 में प्रशंसा पत्र व चेक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सम्पर्क सूत्र-नरसिंहपुर (म.प्र.)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।