राधा जन्म

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sandhya

भाद्र मास शुक्ल पक्ष अष्टमी को ,
प्रकट भयी राधे रानी  सुकमार।
दैव लोक से आ रहे,
सभी दैवता दर्शन को आज।
धन्य धन्य हो रही ब्रज भूमि,
जहाँ रावल में जन्म लियो।
जिस जिस ने दर्शन किये,
हुए पूर्ण सब काज।
धन्य धन्य माँ  कीर्ति ,
धन्य धन्य विर्षभानु नन्दं।
जिनके घर मे जन्म लियो है।
तीन लोक की देवी ने आज।
बाज रही नौवत और शहनाई है।
झूम रहे सब बाल- ग्वाल ।
देख विडम्बना कैसी है,
कंस के अत्याचार सो
पठाय दियो ननसार।
बड़ी हुई जहाँ नानी के
घर मे ही मिला मात का प्यार।
आज है मंगल घङी जो
राधे रानी प्रकट भयी।
करे ‘संध्या’ अभिवंदन,
कर जोर करे प्रणाम।
माँ राधे दया करो,
सफल करो मम काम।।

संध्या चतुर्वेदी
मथुरा उप

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मौन हुए शब्द,कलम भी निशब्द है। अंतरात्मा क्षुब्द,दिमाग भी ध्वस्त है।। मन की चीख़ों की मन मे मौत हो गयी। दिल की अग्नि लगभग शिथिल हो गयी।। जिज्ञासाओ का यौवन भी प्रौढ़ हो गया। बनते जहाँ स्वप्न,वो शयनकक्ष खो गया ।। अपनेपन की एक तस्वीर तराश रहा हूँ। बुझे चूल्हे […]

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।