आज की गज़ल….

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neha chachara

एक शाम जिंदगी की आज भी ढल जाएगी,
फिर से एक रात तुम्हारे बिन ही निकल जायेगी।
मायूसियों का दौर मुझे जो तुमने तोहफे में दिया,
ऐसा कर के क्या तेरी तकदीर बदल जाएगी।
तुमने तो अपना लिया है रुख़सती का सिलसिला,
दिल में मिरे फ़िर भी मिलन की उम्मीद सी पल जाएगी।
बेचैन हूँ मैं किसलिए ,खुद से मैं अब पूछलूँ,
तुम तो जज़्बातों से खेलो धड़कन भी बहल जाएगी।
दिल में तेरे क्या है ‘नेहा’ ये समझ पाती नहीं,
क्या करूँ जिससे ये जीवन डोर सम्भल जाएगी।।
नाम –         नेहा चाचरा बहल
शिक्षा –        ऐन टी टी, बी कॉम, एम कॉम, एम ए (हिंदी),बी एड, प्रभाकर(गायन)
सी सी सी, डी टी पी एवं सी आई ए इन कंप्यूटर एप्लिकेशन
क्षेत्र –       सहायक प्रबंधक ( मानव कल्याण विकासवादी संस्थान )
पता –     झांसी उत्तर प्रदेश 
विधा – गीत, ग़ज़ल, भजन, देशभक्ति, कविता, पंजाबी टप्पे ।
सम्मान –  विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि प्राप्त (द्वारा प्रतापगढ़ यूनिवर्सिटी) ।
प्रकाशन – बुंदेलखंड की कवियत्रियाँ , दुल्हन , अभियान टुडे , दैनिक जागरण, जन सेवा मेल , अमर उजाला आदि समाचार पत्रों में भी रचनाओ को स्थान प्राप्त हुआ है।
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।