अटल चालीसा के अंश

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dashrath
राजनीतिजीवन बनी,दिलसे साहित साज।
कबीर जैसी साधना,जनता रोती आज।।
अटल बिहारी आपका, करता जग सम्मान।
मर्यादा संविधान की, कहते कवी मसान।।
जयजयजयजय अटलबिहारी ।
राजनीति भी तुमसे  हारी।।
पच्चीस दिस चौबिसा आई।
अटल बिहारी जन्में भाई।।
कृष्ण बिहारी पिता तुम्हारे।
जो शिक्षक थे सबसे न्यारे।।
कविता साहित्य खूब रचाये।
दीन दुखिन  को लगे लगाये।।
भाषण व्यंग्य कविता गाई।
हिन्दी भाषा मुकुट बनाई।।
राष्ट्रसंघ  में  भाषण  दीना।
सारे जग ने हिन्दी चीह्ना।।
सन सत्तावन संसद आये।
सत्ता दल के भी मन भाये।।
भारत रतन के तुमअधिकारी।
अटल बिहारी अटल बिहारी।।
हिन्दू मुस्लिम के तुम प्यारे ।
राजनीति में सबसे न्यारे। ।
लोकतंत्र के तुम रखवारे।
न्याय धरम से काज संवारे।।
पाँच दशक संसद बतराये।
भाषण में ठहके लगवाये।।
भारत माता के हितकारी।
सादा जीवन उच्च विचारी।।
तेरह दिन फिर तेरह महिना।
फिर सरकार स्थाई कीना।।
सत्य मार्ग से राज चलाया।
झूठ कपट को दूर हटाया।।
परमाणु से शक्ति दिखलाई।
सारे जग में धाक जमाई।।
दिल्ली लाहोर बस चलवाई।
कारगिल भी आप जिताई।।
किरसानो की पीड़ा जानी।
क्रेडिट कार्ड जगत बखानी।।
गाँव गाँव सड़कें बनवाई।
पानी बिजली घर घर आई।।
सोलह आठा सन् अट्ठारा।
डूबा सूरज गया उजारा।।

#गोपाल नारसन

परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ मई १९६४ हैl आपका निवास जनपद हरिद्वार(उत्तराखंड राज्य) स्थित गणेशपुर रुड़की के गीतांजलि विहार में हैl आपने कला व विधि में स्नातक के साथ ही पत्रकारिता की शिक्षा भी ली है,तो डिप्लोमा,विद्या वाचस्पति मानद सहित विद्यासागर मानद भी हासिल है। वकालत आपका व्यवसाय है और राज्य उपभोक्ता आयोग से जुड़े हुए हैंl लेखन के चलते आपकी हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकें १२-नया विकास,चैक पोस्ट, मीडिया को फांसी दो,प्रवास और तिनका-तिनका संघर्ष आदि हैंl कुछ किताबें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैंl सेवाकार्य में ख़ास तौर से उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए २५ वर्ष से उपभोक्ता जागरूकता अभियान जारी है,जिसके तहत विभिन्न शिक्षण संस्थाओं व विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविरों में निःशुल्क रूप से उपभोक्ता कानून की जानकारी देते हैंl आपने चरित्र निर्माण शिविरों का वर्षों तक संचालन किया है तो,पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों व अंधविश्वास के विरूद्ध लेखन के साथ-साथ साक्षरता,शिक्षा व समग्र विकास का चिंतन लेखन भी जारी हैl राज्य स्तर पर मास्टर खिलाड़ी के रुप में पैदल चाल में २००३ में स्वर्ण पदक विजेता,दौड़ में कांस्य पदक तथा नेशनल मास्टर एथलीट चैम्पियनशिप सहित नेशनल स्वीमिंग चैम्पियनशिप में भी भागीदारी रही है। श्री नारसन को सम्मान के रूप में राष्ट्रीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा डॉ.आम्बेडकर नेशनल फैलोशिप,प्रेरक व्यक्तित्व सम्मान के साथ भी विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर(बिहार) द्वारा `भारत गौरव` सम्मान,पंचवटी हिन्दी साहित्य सेवा सम्मान और मानस श्री सम्मान आदि भी दिया गया हैl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।