किसान …

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shalini jain
किसान अन्नदाता
पर दुर्भाग्य ऐसा की
उसके हिस्से में ही अन्न नहीं आता
कैसा भाग्य ,कैसी नियती ,कैसा तक़दीर का खेल
अन्न दाता ही खुद अन्न के एक एक दानें को तरस जाता
कर्ज ,भूख और मौत तीनो का अन्नदाता से गहरा नाता
भूख और कर्ज से झुकी कमर
कोशिशे जब हो गयी सब व्यर्थ
तब सब्र ने साथ छोड़ा
ज़िंदगी ने मौत की तरफ मुँह मोड़ा
झूल गया वो सब परेशानियों का हल ढूंढ़ते ढूंढ़ते
सवाल है मेरा क्यूँ होता है ऐसे
जो अन्न उगता है जो सबकी भूख मिटाता है
क्यों वो खुद भूखा रह जाता है
न ही कोई खुवाहिश न ही कोई जरुरत
फिर क्यूँ चढी कर्ज की परत दर परत
फिर एक ही समाधान
ज़िंदगी का अंत
हर किसान की यही दुःखद कहानी
आओ मिलकर कुछ ऐसा कदम उठाये
जिससे कर्ज और भूख काल बनकर इनको न निगल जाये
                                 #शालिनी जैन
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।