सशक्त है बदलाव में धरा का दर्द ज्ञात नहीं जुड़ाव संस्कृति से था जो वो हमे अब भाता नहीं बदलाव सिर्फ बदलाव अच्छे से बुरे की ओर जा रहे ओर मान रहे बदलाव इस बदलाव ने धरा का छीन लिया मान दर्द सिर्फ धरा का नहीं शीन हो गए सभी […]

एक विवाहिता जिसने विवाहित जीवन की शुरुआत में ही अपने सुहाग को खो दिया उसके मन के भाव नैनो में सजाये थे कुछ ख्वाब समय की ठोकर ने उन सपनो को चकनाचूर किया ज़िंदगी ने ही मुझे वक़्त न दिया कुछ सहेज लू कुछ समेट लू कुछ बातो को दिल […]

तू अंश नहीं मेरा फिर भी मेरा वजूद है सबब है ज़ीने का मेरे तू मेरा अच्छा नसीब है जुस्तजू थी मेरी जब तक तुझे न पाया था तेरे आने पर हर दिन दीवाली सा मनाया था तू नहीं था जब जीवन में मेरे तब मन में एक अहसास आया […]

सिमट रही थी तेरे आगोश में प्यार पाने को मगर तेरी जुस्तजू तो कोई और थी निगाहे मिलाने से कशिश नहीं आती और दूर जाने से रौनके नहीं मिट जाती हमने प्यार में धोखा खाया जिसे समझा अपना उसे गैर पाया जिसको समझ रहे थे नाकारा उसे तो तुमने सर […]

किसान अन्नदाता पर दुर्भाग्य ऐसा की उसके हिस्से में ही अन्न नहीं आता कैसा भाग्य ,कैसी नियती ,कैसा तक़दीर का खेल अन्न दाता ही खुद अन्न के एक एक दानें को तरस जाता कर्ज ,भूख और मौत तीनो का अन्नदाता से गहरा नाता भूख और कर्ज से झुकी कमर कोशिशे […]

तुम मार्गदर्शक तुम ही हो प्रेरणास्रोत्र तुम हो चट्टान समान जो विपदाओं से बचाता तुम हो एक विशाल वृक्ष जो अपनी छाया से हमारे जीवन में शीतलता लाता तुम ने बचपन हाथ थाम चलना सिखाया और जीवन में जरुरत पड़ने पर तुम्हें अपनी परछाई बना पाया पिता वो शख्सियत है […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।