कारवां गुजर गया… गुबार देखते रहे, महाकवि नीरज को साहित्य मंडल ने दी श्रद्धांजलि

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गोंदिया।
इस सदी के महान गीतकार-कवि व पद्मश्री-पदमभूषण अलंकरणों से सम्मानित गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ के देहावसान पर उन्हें स्मरण करने एवं श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु रविवार दि. २२ जुलाई को भिन्नभाषी साहित्य मंडल गोंदिया द्वारा पूर्व नगराध्यक्ष कवि के. बी. चौहान के सूर्याटोला निवास पर दोपहर ३.०० बजे श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
श्रद्धांजलि सभा का आगाज महाकवि गोपालदास नीरज को गोंदिया के  हिन्दी-मराठी भाषी कवियों, साहित्यकारों व साहित्य प्रेमियों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर और भाव-भीनी श्रद्धांजलि देकर किया। तत्पश्चात् के. बी. चौहान गुरूजी ने गोंदिया के कविसम्मेलनों में नीरजजी की अनेकों बार उपस्थिति और उनके गीतों के रसिकों का स्मरण किया। समीक्षक व  मराठी के सशक्त कवि युवराज गंगाराम ने प्रत्यक्ष न सुन पाने के बाद भी उनके गीतों के प्रति अपने आकर्षण की बात की, वहीं वरिष्ठ पत्रकार मराठी कवि माणिक गेडाम ने विशेष अतिथि के बतौर अपने उद्गार व्यक्त कर कहा कि नीरज जी के गीतों में इतनी खूबी थी कि लगातार दो-तीन घंटों तक श्रोता उन्हें बड़े सम्मान से सुनते थे। प्रमुख अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ.हरिनारायण चौरसिया ने महाविद्यालयीन कार्यकाल में  आयोजनों के समय नीरज जी के सानिध्य और गोंदिया के काव्य प्रेमियों पर उनके गीतों की अमिट छाप का उल्लेख किया। कवि शशि तिवारी ने उनके साथ बीते कुछ पलों एवं नीरज निशा के संस्मरणों के साथ काव्यांजलि अर्पित की। कवयित्री एवं लेखिका सुषमा यदुवंशी, कवि छगन पंचे,चैतन्य मातुरकर, योगेंद्र मेश्राम,सुरेंद्र जगने आदि ने भी नीरज जी को शब्द सुमनांजलि अर्पित की।
अध्यक्ष की आसंदी से कवि एवं प्रखर वक्ता रमेश शर्मा ने कहा-नवोदित कवियों के लिए नीरजजी की गीत विधा प्रेरणास्रोत है तथा कुछ गीतों की बानगी रखते हुए हिंदी काव्य जगत के लिए नीरजजी का निधन अपूरणीय क्षति बताया। शर्मा जी ने छिंदवाड़ा एवं गोंदिया में नीरज जी की रचनाओं को सुनने का सौभाग्य अपने जीवन की उपलब्धि बतलाया और कहा कि नब्बे के दशक के पश्चात उनके गीतों में दर्शन की झलक स्पष्ट दिखाई देती थी। वक्ताओं ने ‘कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे’, ‘इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में’, ‘मगर प्यार को खोजने जो चला तो न तन लेके लौटा न मन लेके लौटा’, ‘देखती ही रहो आज दर्पण न तुम प्यार का यह मुहूरत निकल जाएगा’ जैसी अनेकों रचनाओं का अपने सम्बोधन में उल्लेख कर हिन्दी फिल्मों में उनके गरिमापूर्ण गीतों के योगदान की चर्चा की. अजय चौहान ने प्रस्तावना में नीरजजी की जीवनी व काव्य संग्रहों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की प्रस्तावना अजय चौहान ने रखी। संचालन का दायित्व श्रीज्ञान चौहान ने निर्वाह किया। मंडल के सहसचिव कवि निखिलेशसिंह यादव ने सभा में उपस्थिति के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। सभा में हामिद पटेल, अशोक शर्मा, श्रीमती चौहान सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे। अंत में दो मिनट का मौन रख स्व.नीरजजी एवं गोंदिया के मरहूम शायर सलीम अख्तर के गत १६ जुलाई को बीते स्मृति दिन निमित्त श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।