हिंदी के प्रचार-प्रसार” में मीडिया की भूमिका 

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किसी ने सच ही कहा हैं कि “मीडिया ऐसा टकसाल हैं जहां भाषा  गढ़ती यां सृजित होती हैं !”     निःसंदेह आज हिंदी रूपी नन्हा पौधा न केवल भारत देश के कोने कोने में वरन संपूर्ण धरा पर वट वृक्ष की भाँति अपनी जड़ें फैलाकर गहरी पैठ करने में सफल रहा हैं !
जी हां ..विगत कुछ दशकों से हिंदी भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से भौगोलिक ..भाषाई तथा सांस्कृतिक सीमाएं तोड़ दी हैं ! इसका एकमात्र कारण सोशल मीडिया पर हिंदी भाषागत विस्तारीकरण हैं !  आज हम देखा रहें हैं कि रजत पटल पर छाई हिंदी फिल्में विदेशों में भी बहुत पसन्द की जा रही हैं ! सुमधुर -भावमयी हिंदी गीतों के लाइव कॉन्सर्ट विदेशों में आयोजित किए जाते हैं !  दशकों से टी वी पर हिंदी भाषा में प्रसारित होने वाले सामाजिक ..पौराणिक ..ऐतिहासिक ..पारिवारिक और धार्मिक हिंदी धारावाहिकों ने भारत देश ही नहीं, विदेशों में भी धूंम  म्स्चाने के साथ ही राष्ट्रीय एकता के  सशक्त सूत्र बनकर हिंदी भाषा को जनमानस की भाषा बनाने में भी कारगर सिध्द हुये हैं !
आज लगभग हर वर्ग के व्यक्ति के पास उसका अपना व्यक्तिगत मोबाइल होता हैं !  लोगों के संप्रेषण को सुविधाजनक बनाने हेतु नित नये एपस जारी किए जा रहें हैं जो कि हिंदी में ही उपलब्ध हैं !  मोबाइल और कंप्यूटर में हिंदी टाइप करने हेतु यूनिकोड की सुविधा भी हैं, जिसके  अंतर्गत अंग्रेजी में स्पेलिंग बनाकर टाइप करने से हिंदी टायपिंग आसानी से की जा सकती हैं ! हिंदी टायपिंग की क्लिष्टता को यूनिकोड ” मंगल फोंट” ने अत्यंत आसान  कर दिया हैं ! साथ ही  वाइस टायपिंग से आज मोबाइल पर व्हाट्सएप और टेक्स्ट मेसेज भेजना और भी आसान हो गया हैं , इस माध्यम से हिंदी टंकण ना जानने वाला भी बहुत कम समय में अपनी बात सामान्य बोलचाल वाली हिंदी भाषा में बोलकर आसानी से संवाद -संप्रेषण स्थापित कर सकता हैं !
वर्तमान में “इंटेरनेट यानी अन्तर्जाल” भी हिंदी के प्रचार – प्रसार में मह्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं ! आज इंटरनेट पर 15 से ज्यादा हिंदी सर्च इंजिन मौजूद हैं ! ज्ञातव्य हो कि अधिकतर लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं ! यहां तक कि लगभग सभी सरकारी -अर्ध सरकारी कार्यालयों में “राजभाषा अधिकारी और राजभाषा सहायक कार्यरत होते हैं  और वे अपने अधीनस्थ समस्त शाखाओं में कार्यरत कर्मियों को हिंदी भाषा में कार्यालयीन कार्यों के संपादन के साथ ही  ई-मेल से पत्राचार के लिए हिंदी में कार्य करने का प्रशिक्षण देते हैं ! विदित हो कि प्रत्येक कार्यालय में हिंदी के व्यापक प्रचार- प्रसार हेतु हिंदी में अधिकाधिक कार्य करने वाले कर्मी को पुरस्कृत करने की योजनाए भी सम्मिलित हैं ! कर्मी के कार्यसंपादन में मेल द्वारा किए पत्र व्यवहार भी शामिल किए जाते हैं ! यहां गौरतलब हैं कि आज “पेपरलेस ऑफिस” की ओर कदम बढ़ाने हेतु व्यापक प्रयासों का क्रियान्वयन किया जा रहा हैं ! पुरस्कार योजनाओं का लाभ उठाने अधिकतर कर्मी नेट पर हिंदी में काम करना सीख रहे हैं ! इस बाबत यह सर्व विदित हैं कि विगत कुछ वर्षों से सरकार वृक्ष बचाओ अभियान के तहत सभी संस्थानों में कागज के उपयोग को कम करने हेतु व्यापक अभियान मीडिया के माध्यम  कर रही हैं !
आज बाजार में प्रसारित विज्ञापनों पर मनन करें तो पाएंगे कि स्वास्थ्य, ज़ीवन बीमा, अंगदान  जैसे अहम मुद्दों को प्रचारित -प्रसारित करने और लोगों को आकर्षित करने के लिए विज्ञापन कंपनियां हिंदी भाषा का ही अधिक प्रयोग कर रही हैं क्यूंकि हिंदी भाषा में गुन्थित वाक्य विन्यास एवम संवाद भावनात्मक व मनोवैज्ञानिक रूपा से मानव मात्र के हृदय के अंतस को छूने में अत्यंत कारगर सिद्ध होते हैं !
वर्तमान युग में रसना को सुस्वाद से दो-चार करने और आपाधापी भरी प्रतिस्पर्धात्मक ज़ीवन शैली में स्वयं को सरगम से सजी धुनों को सुनकर नई ऊर्जा से सराबोर करने में दो ही चीजें विशेष रूप से मह्त्वपूर्ण होती हैं, एक तो शहर के कोने कोने में लजीज व्यंजनों को प्रस्तुत करते नईं नई थीम वाले रेस्टोरेंट और गांव-शहर में स्थापित विविध एफ एम चैनल ! जहां एक ओर ऐसे लुभावने रेस्टोरेंट के विज्ञापन जनसामान्य को आकर्षित करने वाली भाषा हिंदी में सिटी टी वी चैनल पर प्रसारित होती हैं वही दूसरी ओर अधिकांश एफ एम में कार्यक्रमों का प्रसारण हिंदी भाषा में ही होता हैं क्यूंकि हिंदी भाषा प्रत्येक वर्ग के मन- मस्तिष्क पर अमिट छाप छोडती हैं साथ ही इसमें प्रसारित होने वाले समाचार भी शहर-गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में प्रसारित होते हैं !
जब मीडिया के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार की बात हो रही हैं तो “समाचार पत्र” भी जेहन में आता हैं ! बेशक रवि-रश्मियों के कोमल स्पर्श और चाय की चुस्कियों के साथ समाचार पत्र पढ़ना हम सभी का प्रिय शगल बरसों से रहा हैं और ताज्जुब की बात हैं कि आज के कम्पूटर युग में भी अंग्रेजी की तुलना में हिंदी समाचार पत्रों की संख्या कहीं अधिक हैं !
एक जमाना था जब वेबसाइट और ब्लॉग्स अंग्रेजी में ही उपलब्ध थे किंतु हिंदी भाषा की क्रांति धारा ही प्रवाहित हो चली हैं और हम देख सकते हैं कि हिंदी बेबसाइट का उपयोग करने वालों का आंकडा दिन-दिन बढ़ता चला जा रहा हैं, साथ हीं लोग ब्लॉग्स भी हिंदी भाषा में लिखना और पढ़ना भी ज़्यादा पसन्द कर रहें हैं क्यूंकि हिंदी भाषा देशवासियों के दिल के करीब हैं !
नशाखोरी की गिरफ्त से आज की युवा पीढ़ी को मुक्त करने के लिए समाचार पत्रों, टी वी और सिनेमा घरों में फिल्म प्रसारण में आते हिंदी विज्ञापनों का लाभ कई पाठकों और दर्शकों तक पहुंचने में सफल होता हैं ! ठीक इसी तरह गांवों के कोने -कोने  में बसें लोगों तक लाइलाज बीमारियों का कम समयावधि में इलाज कराने की सुविधा को सोशल मीडिया पर हिंदी भाषा में प्रसारित किए जानै से कम पढ़े लिखे और दूर दराज में निवास करने वाले लोग भी लाभान्वित होते रहें हैं !
आज की पीढ़ी की शिक्षा संबंधी पठन सामग्री भी अंतरजाल पर सरल -सुलभ उपलब्ध हैं !गूगल पर विषय वस्तु पठनीय और यू ट्यूब पर छोटे छोटे वीडियो के माध्यम से हिंदी में बहुत हीं सुन्दर तरीके से समझाया गया हैं !
सरकारी और व्यक्तिगत प्रयासों से आज यह बोलते हुये अत्यंत हर्षानुभूति होती हैं कि आज हमें हिंदी भाषी कहलाने में किसी प्रकार की हीन भावना का अनुभव नहीं होता क्यूंकि अब मीडिया ने भारत की हिंदी भाषा का संपूर्ण धरा पर विस्तारीकरण कर भाषा को गौरव और सम्मान प्रदान किया हैं !
#अंजली खेर
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।