कश्मीर के हालात………..

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atul sharma
मोदी और महबूबा की,
 टूटनी एक दिन कमान थी,
धधकती मोदी के दिल में,
देश की आन बान शान थी।
जब राष्ट्रप्रेम में थोड़ी भी,
जलने की गंध आती हो,
बुनियाद  खोखली करने को,
दीमक जब लग जाती हो।
मोदी जी का माथा ठनका,
तोड़ दिया जो गठबंधन था,
मुक्ति पाकर मुफ्ती से,
सियासत का तोड़ा बंधन था।
आतंक पला घाटी में खूब,
 और जिया गठजोड़ निराशा में,
 पिलाते रहे नागों को दूध,
शांति की प्यारी आशा में।
खाते रहे मार पत्थरों की,
जो सैनिक हिम्मत वाले हैं,
सुनो सैनिकों की चीखों को,
भारत के जो रखवाले हैं।
बांधे हैं सैनिक आदेशों से,
बरना किया सफाया होता,
इस आतंकी धरती में ही,
पत्थरबाजों को दफनाया होता।
फिर आतंकी भी अनचाहे में,
भक्त राष्ट्र के बन जाते,
तिरंगे को करते प्रणाम,
और राष्ट्रगान की धुन गाते।
निर्भय होकर निर्णय लो मोदी जी,
अब विरोधियों की क्यों फेरी  हैं?
पत्थरबाजों को सबक सिखाने में,
इतनी अब क्यों देरी  हैं?
आजाद करो सेना के हाथों को,
समय की यह मजबूरी है,
 काश्मीर की किस्मत को,
चमकाना आज जरूरी है।
कुचलोऔर बढ़ते जाओ,
जिधर पत्थरों की झोली हो,
भारत मां की जयकारों पर,
 जिधर बरसती गोली हो।
एडी से रगड़ो मुँह उसका,
जो भारत से नफरत करता हो,
भारत को घायल करने की,
जो गंदी हरकत करता हो।

#अतुल कुमार शर्मा

परिचय:अतुल कुमार शर्मा की जन्मतिथि-१४ सितम्बर १९८२ और जन्म स्थान-सम्भल(उत्तरप्रदेश)हैl आपका वर्तमान निवास सम्भल शहर के शिवाजी चौक में हैl आपने ३ विषयों में एम.ए.(अंग्रेजी,शिक्षाशास्त्र,समाजशास्त्र)किया हैl साथ ही बी.एड.,विशिष्ट बी.टी.सी. और आई.जी.डी.की शिक्षा भी ली हैl निजी शाला(भवानीपुर) में आप प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैंl सामाजिक क्षेत्र में एक संस्था में कोषाध्यक्ष हैं।आपको कविता लिखने का शौक हैl कई पत्रिकाओं में आपकी कविताओं को स्थान दिया गया है। एक समाचार-पत्र द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है। उपलब्धि यही है कि,मासिक पत्रिकाओं में निरंतर लेखन प्रकाशित होता रहता हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को उजागर करना हैl 

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matruadmin

One thought on “कश्मीर के हालात………..

  1. देश के दुखद हालातों पर लिखी थी, परेशान होकर यह कविता। आप सबका प्यार पाकर मेरा उत्साहवर्धन हुआ , और लाईक देने के लिए सभी पाठकों का आभार।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।