नयी पहल

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kiran baranval
रजुआ के बाऊजी बी.ए के फारम कहिया मिलेला।
का करब फारम का, दिमाग सठिया गइल का।
बाऊजी के समझ से परे था अशिक्षित पत्नी बी.ए के फार्म की बात उस वक्त क्यों कर रही है जब घर के चिराग को बुझे महीना दिन नहीं हुए।
      राजू चार बहनों का इकलौता  बिगडा लडका था।नाजायज फरमाइशें पूरी होती रहने के कारण गलत संगत में फंस गया।धनी पिता को राजू के बहके कदम में बेड़ी लगाने के लिये विवाह समाधान नजर आया।
      गरीब घर की कन्या तनु बहु बनकर आ गई।राजू  उसके साथ बहुत बुरा व्यवहार करता।नशे की हालत में तनु पर हाथ उठाकर अपनी मर्दानगी पर फख्र करता।माता पिता के समझाने का कोई असर नहीं पडता। अत्यधिक नशे के कारण राजू की असमय मौत हो गयी। सास बहू की दयनीय स्थिति के लिए खुद को दोषी मानती।बहू को शिक्षित कर नयी जिंदगी देने की चाह ने उसे पति से फार्म की बात करने को मजबूर किया।
     तनु आज बैंक में पदाधिकारी है।सास ससुर ने माता पिता का फर्ज पुरा करते हुए सुयोग्य लडके से तनु का पुनर्विवाह कराया। एक नयी पहल जिसने बहू को बेटी का सम्मान दिया।
                        #किरण बरनवाल
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।