नयी पहल

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kiran baranval
रजुआ के बाऊजी बी.ए के फारम कहिया मिलेला।
का करब फारम का, दिमाग सठिया गइल का।
बाऊजी के समझ से परे था अशिक्षित पत्नी बी.ए के फार्म की बात उस वक्त क्यों कर रही है जब घर के चिराग को बुझे महीना दिन नहीं हुए।
      राजू चार बहनों का इकलौता  बिगडा लडका था।नाजायज फरमाइशें पूरी होती रहने के कारण गलत संगत में फंस गया।धनी पिता को राजू के बहके कदम में बेड़ी लगाने के लिये विवाह समाधान नजर आया।
      गरीब घर की कन्या तनु बहु बनकर आ गई।राजू  उसके साथ बहुत बुरा व्यवहार करता।नशे की हालत में तनु पर हाथ उठाकर अपनी मर्दानगी पर फख्र करता।माता पिता के समझाने का कोई असर नहीं पडता। अत्यधिक नशे के कारण राजू की असमय मौत हो गयी। सास बहू की दयनीय स्थिति के लिए खुद को दोषी मानती।बहू को शिक्षित कर नयी जिंदगी देने की चाह ने उसे पति से फार्म की बात करने को मजबूर किया।
     तनु आज बैंक में पदाधिकारी है।सास ससुर ने माता पिता का फर्ज पुरा करते हुए सुयोग्य लडके से तनु का पुनर्विवाह कराया। एक नयी पहल जिसने बहू को बेटी का सम्मान दिया।
                        #किरण बरनवाल

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।