मैं कहीं भी रहूं दर्द रहता मुझे, रो पड़ूँगा अभी ऐसा लगता मुझे। झेलते-झेलते मिट गई जिंदगी, वह कहां तक भला याद रखता मुझे। साथ देता बहुत मेरी तकलीफ में, आज यदि प्यार से कोई सुनता मुझे। सिर्फ मतलब में आवाज देते सभी, वर्ना अपना यहां कौन कहता मुझे। शर्त […]

  जुल्फों में बादलों की घटाओं का फसाना, आंखों में इंद्रजाल का मंजर है सुहाना, चेहरे का नूर कीमती हीरे से कम नहीं- सम्मुख तुम्हारे चांद भी लगता है पुराना। #डॉ. कृष्ण कुमार तिवारी ‘नीरव’

गगन को छूने वाले भाव सारी मंडियों के हैं, कहीं से बूंद भर जल को खुले मुख सीपियों के हैं। हमेशा टूट जाते हैं जरा-सा दाब पड़ते ही, यहां जितने भी एलबम हैं सभी बस दफ्तियों के हैं। स्वयं अपनी ही बातों से मुकर जाता है कोई भी, कहूं क्या […]

सूर्य को दीपक दिखाया जा रहा है, कद अंधेरे का बढ़ाया जा रहा है। उसकी हालत देखकर आया हूँ मैं, दूध चम्मच से पिलाया जा रहा है। जैसे कोई भेड़ बकरा मर गया , इस कदर मातम मनाया जा रहा है। रो रहे मुर्दे पड़े शमशान में, आदमी जिंदा जलाया […]

मंजिलों से दूर मुझको कर दिया है आपने, पथ हमारा कंटकों से भर दिया है आपने। मैं जहां एड़ी उठाकर भी पहुंच सकता नहीं, वहां तक झुंझला के मुझको रख दिया है आपने। झोपड़ी में रहते-रहते तीसरापन आ गया, किस जनम की साधना का फल दिया है आपने। जिंदगीभर पत्थरों […]

वतन का रूप बदलेगा कभी,मुझको नहीं लगता, चमन खुशबू से महकेगा कभी,मुझको नहीं लगता। खिलेंगे फूल खुशियों के गरीबों के भी जीवन में, अब ऐसा सूरज निकलेगा कभी,मुझको नहीं लगता। दिनों-दिन जिस कदर अपने में बढ़ती जा रही महंगाई, चने का भाव उतरेगा कभी,मुझको नहीं लगता। गगन के चांद को […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।