पुस्तक समीक्षा  डॉ. अर्पण जी जैन ‘अविचल’ की पुस्तक ‘पत्रकारिता और अपेक्षाएँ’ अपने नाम को सार्थक करने के साथ-साथ पाठकों की अपेक्षाओं पर भी पूरी तरह खरी उतरी है। लेखन से ज्ञात हुआ कि पत्रकारिता का इतिहास और आज के समय की पत्रकारिता में ज़मीन-आसमान का अंतर आ चुका है। […]

राष्ट्र की सम्पूर्ण संकल्पना, उसके होने का मतलब, उसकी कार्ययोजना, उसकी संस्कृति, उसकी भाषा, लोकव्यवहार और आचरण सबकुछ उसके निवासियों की जागृत मेधा से उन्नत है। और इन्हीं की चिंता और संगठनात्मक परिचय से मिलकर शब्द बनता है राष्ट्रवाद । राष्ट्रवाद शब्द में पहले पायदान पर राष्ट्र आता है, उसके […]

मैंने बदल दी है अपनी मंज़िल की अब राह आहिस्ता-आहिस्ता बस एक उम्मीद जिंदा मिले फैलाकर बाह आहिस्ता-आहिस्ता ज़रूरी नहीं कि पूरा हो हर एक ख़्वाब मेरा खुली आँखों से देखा बस किसी शायर भी मिले हाथ खोलकर वाह आहिस्ता-आहिस्ता चलते चलते थक गए है कदम मिरे अब किससे क्या […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।