बड़े लोगों का रुतबा बोलता है, वो चुप भी हो तो लहजा बोलता हैl वो खुद को शहर का कहता नहीं है, मगर उसका सलीका बोलता हैl वो गंदा जेहन का जितना हो लेकिन, वो माइक पर तो अच्छा बोलता हैl छुपेगी क्या हमारे घर की हालत, मेरा सारा दरीचा […]

सत्य सरल व्रत नहि रहा,पग-पग कंटक राह, इच्छा अरु संकल्प से,पाते निश्चित चाह पाते निश्चित चाह,रखें नित प्रयास ज़ारी, लक्ष्य रखें नित नैन,कल्पना हो नित भारी होता है दुत्कार,पियें जा नित्य गरल धत, अविचल हृदय “विराट”,बनें यह सत्य सरल व्रत॥                     […]

गुज़रा हुआ ज़माना,जब-जब जहन में  आए। दिल फिर मचल के झूमे,बचपन के गीत गाए॥ जाने खता हुई क्या,वो क्यों ख़फा हैं  ऐसे। जब भी मिले हैं मुझसे,नज़रें नहीं  मिलाए॥ कानों में लंबे झुमके,होंठों की तेरी  लाली। माथे की तेरी बिंदिया तारों-सी जगमगाए॥ देखी जो तेरी सूरत,सब-कुछ मैं भूल बैठा। इक […]

शफ़क़ में सफ़ेद …. समंदर नमक का चमचमाते पुखराज के टुकड़ों-सा, लोगों का हुज़ूम फिर भी जाने क्यों,तन्हा छोटे-छोटे गड्ढों पर पड़ा पानी लगते उसके आँसू क्या लोगों के पैरों तले रौंदे जाने का दर्द ? या अकेलापन,उपेक्षा कोई खोदता,मुट्ठी में भरता उछालता,चखता फेंककर चला जाता खोदे जाने का ज़ख्म […]

बनाकर ताज शाहजहां ने, दुनिया को  तोहफा दिया है।  हर आशिक की यादों में,  मुमताज को जिंदा कर दिया है॥  संगमरमर से तराशा है,  मुहब्बत की निशानी को।  जज्बातों से लिख दिया,   प्यार की कहानी को॥  मिसाल ए मुहब्बत को,   रूबरू-ए-दुनिया रख़ दिया है।  हर आशिक की यादों […]

है वफ़ा मेरी मुकम्मल इक रिवायत की तरह, काश आते ज़िन्दगी में तुम इनायत की तरह। तुझसे मिलना बन्दगी से कम नहीं हर्गिज़ सनम, मैंने देखा है सदा तुझको इबादत की तरह। अश्क तेरे मुझसे हरगिज़ छुप नहीं सकते कभी, रोज़ पढ़ता हूँ तेरा चेहरा किसी ख़त की तरह। नाम […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।