3

इश्क-ए-कोहसार से, कूद के उतरती है ये जिस्म की नदी। झरने-सी गिरती, कूद-फाँद करती उछल-उछल बहती। फिर वक्त के मैदान में, खामोशियों की झील-सी.. मर्यादा के पाटों में, मन्द-मन्द बहती। और शिद्दत की कभी, बरसातों में अक्सर पाट तोड़ बहती। पाने को अंत में, रूह-ए-समंदरम्। रूह-ए-समंदर से, उठती फिर काली […]

1

(विश्व वन्यजीव दिवस पर विशेष ) हरियाली से भरपूर हो जंगल, वन्यजीव रहते आनंद-मंगल। धरा से घटती इनकी संख्या, देख आश्चर्यचकित होगा कल। मत फैलाओ जंगल में अनल, इनसे ही आता धरा पर जल। वन्यजीवों का करें संरक्षण, गुजारे ये भी खुशियों के पल। मोर,शेर,गाय,हिरण-चीतल, देखकर मन हो जाए शीतल। […]

2

आशिक जब माशूका का शौहर बन जाएगा, इश्क का मीठा गुड़ यारों गोबर बन जाएगा। कहलाएगा बॉस शहर में,पर अपने घर में, बेगम का ताबेदार वो नौकर बन जाएगा। रोएगा दिल में,हँस के दिखलाए महफ़िल में, अपने ही घर सर्कस का जोकर बन जाएगा। आया तो बन चुका,वो बच्चों को […]

3

जिंदगी की कल्पना करूं या,मौत लिखूं.. मैं लिखूं तो आखिर किस पर लिखूं । फूलों की क्यारियों में है कांटों की चुभन भी, महकते कश्मीर में है बारूद की धमक भी.. इंसान की मासूमियत कहूं या जुल्म लिखू मैं, लिखूं तो आखिर किस पर लिखू मैं । एकता में घुल […]

1

होती सबको प्यारी बेटी, सबकी राजदुलारी बेटी.. गुड़िया को बहलाती बेटी, जीवन को महकाती बेटी। सपनों को चहकाती बेटी, रिश्तों को समझाती बेटी.. कलियों-सी खिल जाती बेटी, मुझसे जब मिल जाती बेटी। सपनों में मुस्काती बेटी, माँ को नाच नचाती बेटी.. पापा काँधे चढ़ती बेटी, उमर लांघकर बढ़ती बेटी। यौवन […]

ओ हक़ीक़तों की दुनिया, मुझको मेरा यार लौटा दे.. संग हवा के खेलता था जो, वैसा ही अखबार लौटा दे। जाने किन रंगों से तुमने, उसका वर्ण भिगो दिया है.. दिखलाकर कितने मोती, सपनों मे यूं डुबो दिया है। हमने भी तो खेली थी वो, बिन रंगों की एक होली.. […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।