रमा के मौन व्रत का आज सातवां दिन था। उसने परिवार में सबसे बोलना बंद कर दिया था। दिन भर सबके काम करना और फिर चुपचाप अपने कमरे में चले जाना ही अब उसकी दिनचर्या थी । बीमार सास की सेवा करना उसका ध्येय था किंतु जेठानी की अनावश्यक दखलंदाजी […]
वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आख़िरी पूर्ण बजट पेश करने के बाद शाद अजीमाबादी की ये पंक्तियां याद आ रही हैं-‘तमन्नाओं में उलझाया गया हूं…खिलौने देकर बहलाया गया हूं’। वित्त मंत्री के बजट भाषण के दौरान सबसे ज्यादा तालियां उस समय बजी जब राष्ट्रपति,उप राष्ट्रपति,राज्यपाल और सांसदों के वेतन की […]
कहावत है बेगानी शादी में अब्दुल्ला दिवाना, इश्क की शमा में सदा जलता है परवाना। आदत से मजबूर ये दो भले ही किरदार हैं, अंदाज मजाकिया लेकिन बात वजनदार है। अपनी खुशी मे खुश हुए तो क्या खुश हुए, अपने गम मे अगर गमगीन हुए तो क्या हुए। मजा तो […]
‘हम भारत के लोग’ से शुरू होने वाले हमारे संविधान की प्रस्तावना में आगे कहा गया है कि हम अपने लिए एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना का संकल्प लेते हैं। २६ जनवरी १९५० से लागू हुए इस संविधान में हमने लिए गणराज्य या गणतंत्र का चुनाव तो […]
`बसंत` मतलब कवियों और साहित्यकारों के लिए थोक में रचनाएं लिखने का सीजन। बसंत मतलब तितलियों का फूलों पर मंडराने,भौंरे के गुनगुनाने,कामदेव का प्रेमबाण चलाने,खेत में सरसों के चमकने और आम के साथ आम आदमी के बौरा जाने का दिन। बसंत मतलब कवियों व शायरों के लिए सरस्वती पूजन के नाम […]
दिन वही,रात वही, वही है प्रकृति भी पर जरूरी होती है गणना… इसीलिए मान लेते हैं हम सब, बदल गया दिन,माह या साल जबकि बदलता नहीं कुछ भी। यह मान लेना ही भर देता है, अंतस और जीवन में हमारे खुशियां। गणित का सिद्धांत भी कहता है यही- चलें मानकर, […]
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।
वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।