हम सब में मौजूद है गद्य लेखन क्षमता 

devendr soni
साहित्य की अनेक विधाएं हैं । इन विधाओं में से ही एक है – गद्य लेखन । काव्य को छोड़ दें तो अन्य विधाएं भी गद्य के अंतर्गत ही आती हैं । चाहे वे – एकांकी हों , उपन्यास हों , कहानियां हों , लघुकथाएं हों या सिने स्क्रिप्ट हों । सभी का मूल गद्य ही है । इसलिए कह सकता हूँ कि – साहित्य में गद्य का महत्वपूर्ण योगदान और वर्चस्व है।
जहाँ काव्य में अपनी बात कम शब्दों में कहना होती है वहीं लेख में इसके विस्तार और प्रस्तुतिकरण का पूर्ण अवसर मिलता है । यही विस्तार पाठक को आपसे जोड़ते हुए प्रभावित करता है।
यदि गद्य लेखन की ही बात करें तो यह मेरे मतानुसार हम सब में बचपन से ही परिपक्व होने लगता है । स्कूल में जाते ही हम जो लिखना सीखते हैं वह् भले ही पाठ्यक्रम के अंतर्गत आता हो लेकिन होता गद्य में ही है । फिर धीरे – धीरे हम जो पत्र , निबंध आदि लिखने लगते हैं वह भी गद्य लेखन ही होता है ।
यही लेखन प्रक्रिया  मोबाइल पर संदेश लिखने में भी गद्यात्मक ही होती है अर्थात हम सब प्रतिदिन कुछ न कुछ गद्य में लिखते ही हैं ।
लेख लिखने के लिए बस इतना जरूरी होता है कि हम जिस विषय पर लिखना चाह रहे हैं , उसकी हमको जानकारी हो । यह हमारे चिन्तन , मनन और अध्ययन से परिष्कृत होती जाती है । आगे चलकर अपनी रुचि के अनुसार यही लेखन प्रवृत्ति विभिन्न विधाओं में विभक्त हो जाती है । यह विधाएं आपकी कल्पना शक्ति और लेखन पर निर्भर करती है।
मै यहाँ किसी भी विधा को परिभाषित नही करना चाहता । बस इतनी अपेक्षा रखता हूँ  और दावे से कह सकता हूँ कि – गद्य लेखन की प्रवृत्ति हमारे अंदर मौजूद रहती है । जरूरत है इसे समझने और अभिव्यक्त करने की ।
तो हो जाइए तैयार .. गद्य लेखन के लिए ।
#देवेंन्द्र सोनी , इटारसी।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।