द्रोपती की ईज्जत बचाई आप ने अब बेटियों की पुकार सुन चले आईये
श्री कृष्ण अब इन बेटियों की ईज्जत बचाने आईये
जिस बेटी को धरती का सबसे पवित्र माना गया
हर कार्य का पहले शुभारंभ जिसके हाथो से किया गया
आज क्यो वह लुट रही क्रुरता भरे बाजार में इस बाजार पर लगाम लगाने चले आईये
श्री कृष्ण अब इन……….
अर्जन को ज्ञान दिया तुमने युद्ध स्थल पर
हुई विजय मनी खुशियां इस विश्व भूमि पर
इन दुराचारियों को सबक सिखाने का लोगों में सन्देश जगाईये
श्री कृष्ण अब इन……….
ये क्या हुआ बेटी तेरे साथ क्रुरता भरा
झलकाती है मां आसू अपने मोतियों की तरह
सोती नही रात भर रोती दुखी वो मां अब रो रही इस मां की पीड़ा को सुनने आईये
श्री कृष्ण अब इन ……….
लुट रही थी बेटियां जब बीच सड़को पर
कोई नहीं गया ढकने शरीर थोड़े से कपड़ो से
देख रहे थे तमासा लुटटी हुई बेटी का उन लोगों को जानवर से इन्सा बनाने आईये
श्री कृष्ण अब इन ………
कम न हुआ उस भरी सभा में एक इंच भी कपड़ा
बड़ता ही गया वह तो सबको था अचम्भा
द्रोपटी की प्रार्थना की स्वीकार आप ने अब बेटियों की चीख भरी प्रार्थना सुनने आईये
श्री कृष्ण अब इन ………
कहा गये वो लोग कहां गयी वो मानवता
जहां बेटियों की इज्ज़त लुटते देख इनका जी भी न मचलता
प्रेम को बना लिया अश्लीलता अब तो लोगों ने
अब इन को भी समझाने आईये
नाम-अंकित जैन
साहित्यिक उपनाम-विरागांकित
जन्म स्थान -पथरिया
वर्तमान पता- पथरिया जिला दमोह
राज्य-मध्यप्रदेश
शहर-पथरिया
शिक्षा- बी. ए.(अध्ययनरत)
विधा -गीत/कविता/लेख
अन्य उपलब्धियाँ- संगीत में गाना और बजाना दोनों में ही समाज के चहेता
लेखन का उद्देश्य- मात्र भाषा हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और हिंदी भाषा को बढ़ावा देने का प्रयास करना