खर्चीले विवाहों का औचित्य ?

devendr soni

वर्तमान में मुझे विवाह की परिभाषा बदलती हुई नजर आ रही है। अब विवाह का अर्थ वि + वाह ! पर आधारित हो गया है अर्थात विवाह वही जिसे देखकर लोग कहें – वाह वाह ! वाह वाह !
यह स्थिति कमोवेश हर वर्ग में देखने को मिल जाती है । आपके पास पर्याप्त अर्थ ( धन ) की व्यवस्था हो या न हो , वाहवाही जरूरी है। भले ही यह मुहँ देखी हो । इसके लिए हम अपनी सामर्थ्य के बाहर जाकर भी आयोजन करने से पीछे नही हटते हैं।
बस यहीं से शुरू होता है -खर्चीली शादियों का चलन , जो हमारे झूटे दर्प को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है । यह कुछ समय के लिए हमारी ” नाक ” को बड़ी जरूर कर देता है लेकिन बाद में देखा देखी करने वालों की ” नाक ” कटवाने से भी पीछे नही रहता है और कभी कभी तो हमारी भी।
खर्च करना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है इसलिए औचित्य – अनोचित्य की बात करना बेमानी है । हम सब यही कहेंगे – खर्चीली शादी का कोई औचित्य नहीं पर जब अपना वक्त आएगा तो वही करेंगे जो अन्य लोग करते आए हैं ।
बराबरी तो कोई भी, कभी भी, किसी भी क्षेत्र में नही कर सकता लेकिन बढ़ – चढ़ कर , करने का प्रयास जरूर करता है। क्योंकि आज का  दौर दिखावे का और मनमर्जी का है। इस दौर में जागरूक और मितव्ययी व्यक्ति भी अपने परिजनों और अपनी प्रतिष्ठा के दवाब में , वह सब करता है जिसे हम अनुचित और अनावश्यक ठहराते हैं ।
जो हो रहा है वह आगे भी होता रहेगा । मैं यहां विवाह में होने वाली फिजूलखर्ची के बारे में कुछ नही लिखना चाहता क्योंकि मैं जानता हूँ उपदेश देने सरल है पर उन पर अमल करना नामुमकिन।
हां , एक बात जरूर कहना चाहता हूँ ,जिसे हम सब अपना सकते हैं और इसके लिए समारोह में शामिल होने गये अपने परिजनों / मित्रों को भी प्रेरित कर सकते हैं । वह यह – प्लेट में खाना उतना ही लें जितना जरूरी हो। समारोहों में अनेक स्टॉल होते हैं उनमें से भी वही लें जो आपके स्वास्थ्य के लिए हितकर हों । पेटू न बनें ।
मैने अक्सर उन लोगों को देखा है – जो अपनी प्लेट में सब चीजें बहुतायत में उंडेल लेते हैं और फिर उन्हें ना खाने की स्थिति में डस्टबिन में डाल देते हैं । हमारी इस खराब आदत को यदि हम बदल सकें तो यही हमारे लिए खर्च बचाने में बड़ा योगदान होगा। कम से कम हम खुद तो आत्म सन्तोष लेकर लौटेंगे ही।
 # देवेंन्द्र सोनी

matruadmin

Next Post

 "क्यों समझता मुझे खिलौना"

Thu Mar 15 , 2018
क्यों समझता मुझे खिलौना, आखिर मैं भी तो हूं इंसान । देखकर तेरी तानाशाही, बहुत ज्यादा हूं मैं हैरान।। पुरुषवाद का घमंड तुझे, तुझ पर अंधा नशा ये छाया है, बनाकर पिंजरे की चिड़िया मुझे, क्या बता तूने पाया है। गुरुर ने तुझमे पैर पसारे, बेईमानी का तुझ पर साया […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।