प्यार का है बोलबाला हर गली में,
आशिकी कब इस जमाने में छिपी है।
नाचती है मौत चौराहे…नगर में,
बीच हर बाजार दुर्घटना…घटी है।
इश्क आशिक को लगा करता सभी कुछ,
प्यार में पड़ के नजर किसकी हटी है।
जब मुसीबत में समझ आए न रस्ता,
मौत उसको तो लगे प्यारी बड़ी है।
जी सकें तो चैन से जी लें अभी सब,
आखिरी हो क्या पता कोई घड़ी है।
जो किसी के काम आए आप देखो,
फिर खुशी सबसे बड़ी सबको मिली है।
जब अकेले में मिले हैं दो… जबां,
फिर कमी तो मौन की उनको खली है॥
#सुनीता उपाध्याय `असीम`
परिचय : सुनीता उपाध्याय का साहित्यिक उपनाम-‘असीम’ है। आपकी जन्मतिथि- ७ जुलाई १९६८ तथा जन्म स्थान-आगरा है। वर्तमान में सिकन्दरा(आगरा-उत्तर प्रदेश) में निवास है। शिक्षा-एम.ए.(संस्कृत)है। लेखन में विधा-गजल, मुक्तक,कविता,दोहे है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय सुनीता उपाध्याय ‘असीम’ की उपलब्धि-हिन्दी भाषा में विशेषज्ञता है। आपके लेखन का उद्देश्य-हिन्दी का प्रसार करना है।