दुविधाओं ने घेर लिया था

giriraj
कैसे जीत मुझे मिल पाती संघर्षों की उहापोह में,
भीतर तक अनमनी ललक को दुविधाओं ने घेर लिया था।

अपनेपन का जाल बिछाकर, अपनों ने ही ऐसा फाँसा,
सारे पंख उतिनवाकर भी, हँसता रहा आह बिन दिन-दिन।

न तो फड़फड़ा पाया जी भर, और न बदल सका मैं करवट,
ऐसा विवश हुआ मूरख-सा, फँसता रहा चाह बिन दिन-दिन।

मेरे अलिखित अनुबंधों को,लोग समझते रहे समर्पण,
लेकिन सच की छाया तक को, विपदाओं ने घेर लिया था।

धीरे-धीरे नए परों के ,अंकुर फूट जवानी आई,
सोचा चलो उड़ेंगे नभ में, दुनिया देख- देख डोलूँगा।

तब तक चोंच और पाँवों से,बन्धन की हो गई मित्रता,
पाया मैं तो पराभूत हूँ ,बन्दी हूँ,कैसे बोलूँगा।

कुछ करने की ललक मर गई,ठण्डे सब अरमान हो गए,
मैं निरीह असहाय हो गया,बाधाओं ने घेर लिया था।

सपने में भी खुद के बल पर,नीड़ बना पाना मुश्किल था,
फिर तो सोने के पिंजरे पर,थोड़ा नहीं, बहुत इतराया।

दाना-पानी रोज समय पर,मिलने को मैंने सुख समझा,
सारे दुखड़े भूल-भाल कर,नियति नटी का मन समझाया।

कैसी भी अब शेष तमन्ना,दिल को फीकी-सी लगती है,
कारण है इस समय अपेक्षित, सुविधाओं ने घेर लिया है।

#गिरेन्द्रसिंह भदौरिया ‘प्राण’

matruadmin

Next Post

मैंने सोचा

Mon Feb 13 , 2017
वक़्त की नदी से कुछ बून्द चुरा लूँ, पर वक़्त की नदी तो रुकने का नाम ही नहीं लेती। क्या वो ज़िन्दगी के सागर से ज्यादा तेज चलती है? फिर सोचा,तो पता लगा वक़्त की नदी ज़िन्दगी के सागर में ही मिलती है। फिर क्यों वक़्त की नदी, किसी एक […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।