अंतरराष्ट्रीय लघुकथा प्रतियोगिता के लिए लघुकथाएँ आमंत्रित, नियमावली अवश्य पढ़ें

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समस्त लघुकथाकारों को यह सूचित करते हुए अत्यंत हर्ष है कि मातृभाषा डॉट कॉम के तत्त्वावधान में एक अंतरराष्ट्रीय लघुकथा प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। विश्व के सभी देशों के हिंदी लघुकथाकार इस प्रतियोगिता में सादर आमंत्रित हैं। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के नियम व शर्ते निम्नानुसार हैं:

नियम व शर्तें

  1. विश्व के सभी देशों के हिंदी लघुकथाकार इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।
  2. एक लघुकथाकार केवल एक लघुकथा प्रेषित कर सकता है। उसके साथ संक्षिप्त परिचय एवं एक फ़ोटो ज़रूर संलग्न करें।
  3. लघुकथा स्वरचित हो और मातृभाषा पर पहले से प्रकाशित ना हो। किसी भी दशा में यदि किसी की भी रचना कहीं से भी कॉपी की हुई पाई गई तो वह कानूनी रूप से ख़ुद ज़िम्मेदार होगा/होगी।
  4. यदि यह पता चलता है कि रचना पहले से ही मातृभाषा पर प्रकाशित हुई है तो प्रविष्टि को अस्वीकृत कर दिया जाएगा।
  5. विषय लघुकथाकार द्वारा ही निर्धारित किया जाए। हालांकि हिंदी भाषा के प्रचार संबंधित लघुकथा व कोई लघुकथा आज के समय की किसी विसंगति को उजागर करती हो अथवा समसामयिक सन्देश देती हो।
  6. रचना में किसी भी प्रकार की अश्लीलता, फूहड़ता अथवा द्विअर्थी संवाद नहीं होना चाहिए।
  7. प्रतियोगिता में कोई भी भाग ले सकता है। आयु आदि का बंधन नहीं है।
  8. प्रतियोगिता में भागीदारी पूर्णतः नि:शुल्क है।

पुरस्कार

प्रथम- 1100/- मूल्य की पुस्तकें एवं प्रतीक चिह्न।

द्वितीय- 700/- मूल्य की पुस्तकें एवं प्रतीक चिह्न

तृतीय- 500/- मूल्य की पुस्तकें एवं प्रतीक चिह्न

प्रथम, द्वितीय व तृतीय के साथ उल्लेखनीय स्थान प्राप्त करने वाली 50 लघुकथाओं को डिजिटल सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।

  1. प्रत्येक प्रतिभागी को रचना प्रेषित करने पर प्रशस्ति-पत्र दिया जाएगा। प्रेषण प्रक्रिया 1. लघुकथाओं को matrubhashaa@gmail.com पर मेल करना है, जिसके विषय में ‘लघुकथा प्रतियोगिता हेतु प्रविष्टि’ अनिवार्य रूप से लिखना है।

2. प्रतियोगिता में अपनी रचनाओं को 5 जनवरी से लेकर 30 जनवरी तक भेज सकते हैं।

3. मातृभाषा दिवस 21 फ़रवरी 2023 को इस प्रतियोगिता का परिणाम https://www.matrubhashaa.com पर प्रकाशित किया जाएगा एवं पुरस्कार वितरण ‘विश्व पुस्तक मेला 2023’ में संस्मय प्रकाशन के द्वारा किया जाएगा।

  1. सबसे ज़्यादा पढ़ी गयी रचनाओं को भी विशेष तौर पर उल्लेखनीय स्थान देने के लिये चुना जायेगा।
  2. चूँकि यह प्रतियोगिता आपकी प्रतिभा को परखने हेतु की जा रही है, अतः विषय, शिल्प, शैली आदि की नवीनता को प्राथमिकता दी जाएगी।
  3. प्रतियोगिता सौहार्दपूर्ण रहे, यह प्रतिभागियों का भी दायित्व है। किसी भी प्रकार के सन्देह, स्पष्टीकरण अथवा शिकायत होने पर कहीं अन्य वार्तालाप के स्थान पर आयोजकों से नि:संकोच संपर्क करें। इस हेतु प्रतियोगिता के समय एवं पश्चात् भी matrubhashaa@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।