मातृभाषा में अधिक से अधिक अपने कार्य करें- श्री भार्गव

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कहानी-संग्रह ‘मोहरबंद’ विमोचित

कहानी में नई सोच को स्थान दें युवा रचनाकार- श्रीमती सोलंकी

इन्दौर । शहर के नवनिर्वाचित महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने आह्वान किया है कि ‘अपनी-अपनी मातृभाषा में अधिकाधिक संवाद करें, इससे मातृभाषा के विकास और विस्तार को गति मिलेगी। अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करें।’ श्री भार्गव रविवार शाम मुंशी प्रेमचंद की जन्म जयंती प्रसंग पर मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा आयोजित युवा रचनाकार श्रुति पंवार के कहानी-संग्रह ‘मोहरबंद’ के विमोचन के दौरान स्थानीय राजेन्द्र माथुर सभागार, इन्दौर प्रेस क्लब में बोल रहे थे। आयोजन में मुख्य अतिथि नवनिर्वाचित महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विशेष अतिथि संयुक्त संभागायुक्त, इंदौर सपना शिवाले सोलंकी व इन्दौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी रहे।

दीपप्रज्वलन के उपरांत अतिथियों का स्वागत नितेश गुप्ता, अखिलेश सिंह पंवार, शोभना पंवार, तेजबहादुर सिंह तंवर, अरुण सिंहजी गेहलोत, राजेंद्र सिंह तंवर, देवेंद्र पटेल, डॉ. नीना जोशी, जलज व्यास ने किया।
अतिथियों का शब्द स्वागत मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने किया।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा नवनिर्वाचित महापौर का साहित्य परिवार में प्रथम अभिनन्दन किया गया।

अभिनन्दन उपरांत अतिथियों द्वारा पुस्तक विमोचन किया गया।
पुस्तक चर्चाकार के रूप में रमेश चंद्र शर्मा एवं रश्मि चौधरी ने पुस्तक चर्चा कर बताया कि ‘श्रुति के लेखन में नवीनता हैं।’

विशेष अतिथि सपना शिवाले सोलंकी ने कहा कि ‘कहानी लिखते वक़्त रचनाकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि इसका अंत सुखद और सकारात्मक हो । नई सोच के साथ युवा पीढ़ी सृजन करे।’
प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने सदन को संबोधित करते हुए पुस्तक प्रकाशन की बधाई प्रेषित की।

इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार हरेराम वाजपेयी, आशु कवि प्रदीप नवीन, देवेन्द्र सिंह सिसौदिया, वरिष्ठ पत्रकार मुकेश तिवारी, हर्षवर्धन प्रकाश, डॉ. कमल हेतवाल, अखिलेश राव, मुकेश इंदौरी, अवनीश पाठक सूर्य, विवेक सिन्हा,श्रुति अग्रवाल, वाणी जोशी, दामोदर वीरमाल, अमित अभ्यंकर आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रीति दुबे व आभार कवि गौरव साक्षी ने माना।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।