सरदार वल्लभ भाई पटेल

0 0
Read Time3 Minute, 46 Second

अखंड भारत के निर्माता सरदार वल्लभभाई पटेल गुजरात के खेड़ा जिल्ले में 31 अक्टूबर 1875 मे जन्मे थे, उन्होने भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में भी हिस्सा लिया था, बार डॉली सत्याग्रह मे नेतृत्व के रूप में सफलता हासिल की थी इस लिए महिला ने उनको सरदार की उपाधि से नवाजा था, वो भारत के स्वातंत्र्य सेनानी थे, उन्होने रियासतों बिखरी हुई थी उन्हे भारत में विलय कराया था लेकिन जम्मू कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद के राजवी शामिल न हुए, उन्हे लोह पुरुष के नाम से जाना जाता है,, वो राष्ट्रीय कॉंग्रेस में शामिल थे, उनका जन्म किसान परिवार में हुआ था, उनके पिताजी का नाम झवेर् भाई पटेल और माताजी का नाम लाडबा था, वो उनके माता पिता की चौथी संतान थे,
खेड़ा मे जब अकाल पड़ा था तो एँग्रेज सरकार को कर माफी मांगी थी, इस कार्य में गांधीजी और अन्य लोग जुड़े हुए थे लेकिन सरकार ने माना कर दिया लेकिन उन्होने सरकार को कर नहीं भरने के लिए किसानो को बताया, अंत में सरकार झुकी और कर मे राहत दिया था,
वो बेरी स्टार की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए थे, उन्होने अहमदाबाद में वकालत की थी, वो गांधीजी के विचारों से प्रेरित होकर स्वतंत्रता की लड़ाई में जुड़े थे, वो निडर और राष्ट्र को समर्पित थे,
उनकी सम्मान में ahm में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम सरदार वल्लभ भाई पटेल हवाई अड्डा रखा, नर्मदा के किनारे सरदार पटेल के नाम से सरदार डेम बनाया गया है, उनके स्वन्त्रता के समय में लिखे गए पत्र का 10 खंड में प्रकाशित किया गया है, उसका हिन्दी अनुवाद भी किया गया है, वो दुर्गा प्रसाद ने संपादित किए गए थे और नवजीवन प्रेस ने प्रकाशित किया गया है, 1945 से 1950 तक के स्वतंत्र ता के समय के ये पत्र राष्ट्र के भंडार में रखे गए हैं, उनके नाम से सरदार पटेल विश्व विद्यालय भी बनाया गया है,
31 अक्टूबर 2013 में सरदार पटेल की 137 वी जन्म जयंती के अवसर पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभ भाई पटेल स्मारक का शिलान्यास किया गया था, लोह धातुसे 93 मीटर ऊंची विश्व की सबसे बड़ी, ऊंची प्रतिमा नर्मदा नदी के बीच बनाई गई है, उसे स्तेच्यु ऑफ यूनिटी नाम दिया गया है, उसका अर्थ है एकता की मूर्ति, वो करीबन 3000 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है, उसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग जाते हैं, ऎसे लोह पुरुष सरदार पटेल जी को नमन…..
#डॉ गुलाब चंद पटेल
कवि लेखक अनुवादक
अध्यक्ष
महात्मा गांधी साहित्य मंच गांधी नगर

matruadmin

Next Post

साहित्य के आकाश में आप नक्षत्र हैं या बादल

Thu Oct 29 , 2020
साहित्य की गंगोत्री से लेकर छोटी-छोटी नहरों तक की यात्रा से आप परिचित होंगे। शुचिता और पथ पर अवरुद्ध होते हुए भी कितनी नदिया प्रसिद्धि के सागर में मिली, यह भी आप जानते हैं। वर्तमान परिदृश्य देखिए। हम क्या लिख रहे हैं और क्यों लिख रहे हैं। इतना लिखने के […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।