अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस

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👧🏻मत मार मुझे जीवन दे माँ,
मुझको भी दुनिया देखने दे,
मैं तेरे दिल का टुकड़ा हूं,
फिर क्यों मुझ पर ही वार करें।
मत मार मुझे …

👧🏻 तू भी तो एक नारी है माँ,
फिर क्यों नारी का अपमान करे,
तू दिल है मैं तेरी धड़कन,
फिर क्यों अपने से दूर करे,
तू ममता का सागर है,
फिर क्यों इतनी मजबूर है माँ।
मत मार मुझे….

👧🏻 मैं ईश्वर का वरदान हूं माँ,
तू क्यों ना मुझे स्वीकार करे,
सुन मेरी माँ बेटी तेरी,
करती तुझसे अरदास यह माँ,
रख दिल पर अपने हाथ ओ माँ,
सुन मेरे दिल की पुकार ओ माँ
मत मार मुझे…

👧🏻आएगी अगर कोई मुश्किल तो,
मैं ढाल तेरी बन जाऊंगी
हर खुशी और तेरे हर गम में माँ,
मैं तेरा साथ निभाऊंगी,
पढ़ लिख कर इस जग में माँ,
मैं दुनिया में नाम कमाऊंगी।
मत मार मुझे….

सपना – (स० अ०)

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'हिंदी, इसकी बोलियाँ और अष्टम अनुसूची' पर 'वैश्विक ई संगोष्ठी' संपन्न ।

Mon Oct 12 , 2020
‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के तत्वावधान में दिनांक 10 अक्तूबर, को सायं 4.15 बजे से ‘हिंदी, इसकी बोलियां और अष्टम अनुसूची’ विषय पर वैश्विक ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के निदेशक डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’, वैश्विक हिंदी सम्मेलन की संयोजक डॉ. सुस्मिता भट्टाचार्य, वरिष्ठ पत्रकार और भारतीय […]

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।