संवाद लड़का-लड़की

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मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ लेकिन उससे पहले लड़कों की तीन खूबी और तीन बुराई बताओ
“पहली खूबी यह है कि मैं लड़का हूँ
“क्यों ! लड़की होना गलत है क्या? तुम लिंगभेद को बढ़ावा देते हो यह खूबी नही मानते।”
“नहीं यह लिंगभेद को बढ़ावा नहीं हर किसी को भगवान् ने जैसा बनाया उसी मे गर्भ करना चाहिए। और मुझे लड़का होने पर गर्व है, तो इसमें गलत क्या?”
“ओह अच्छा इंटेलीजेंस ब्वॉय दूसरी बताओ? “
“हम वक्त के गुलाम और भावनाओं के पाबंद होते हैं।”
“गुलाम! मतलब भाग्य पर निर्भर रहते हो। कर्म को नहीं मानते, और भावनाओं के पाबंद मतलब पुरानी सोच के मां बहन के कहने पर पत्नी को भी मार सकते हो ?”
“जी नहीं वक्त का गुलाम हूँ भाग्य का गुलाम नहीं , खराब वक्त में भी भाग्य लिखा जा सकता है, और भावनाओं का पाबन्द हूँ मानसिक पाबंद नहीं सोचन शक्ति है।”
“ओह सीरियस मैन,तीसरी बताओ।
“हम प्रकृति प्रेमी होते हैं जैसे भांग गांजा वगैरह वगैरह
“भकक! चलो अब कमियाँ बताओ।”
“हमसे लड़की जरा सा प्यार से बात क्या कर ले, हम उसे प्यार समझ बैठते हैं, और जाने क्या-क्या सोच लेते हैं, चाहे वह चुड़ैल ही क्यों न हो हुस्न परी का दर्जा देकर समाजिक व्यवस्था के साथ खिलवाड करते हैं।”
“अच्छा अच्छा दूसरी बताओ।”(लार घूंटते हुए )
“दूसरा लड़कियाँ हमसे झूठ मूठ का प्यार इजहार करती हैं और चिकनी चुपडी बातें करके दिल तोड़कर चली जाती हैं , लेकिन हम फिर भी लडकियों पर यकीन कर लेते हैं , और सोचते हैं कि यह वैसी नही है जबकि अधिकतर वैसी ही होती हैं।”
“नहीं नहीं ऐसा नही होता तुम लडकों की सबसे बड़ी समस्या है सब को शक की निगाह से देखते हो गलत बात है, सभी लड़कियाँ ऐसी नही होतीं, तुम क्या यह बात सही मानते हो?”
“मैं सही मानता हूँ तभी टॉप तीन कमियों में इन्हें गिनाया, और खुदा कसम मैं कभी भी किसी लड़की पर एतबार नही कर सकता चाहे वह अपने बाप के सामने ही क्यों न प्यार का इजहार करे।”
“तुमसे प्यार का इजहार और बाप! खैर तीसरी बताओ।”
“हम भावनाओं को समझ लेते हैं हमें यह भी पता होता है हमारे साथ कौन क्या कर रहा है फिर भी हम सब जानते हुए उसपर ऐतबार करते हैं।”
“जानते हो फिर भी क्यों ऐतबार करते रहते हो कोई खास वजह?”
“वह सब छोड़ो यूपीएससी का इंटरव्यू नहीं दे रहा। खैर फिलहाल मुझे यह याद नहीं आ रहा। वैसे तुम कुछ कहने वाली थी?”
“अंऊंअ।”
“वो हैलो क्या सोच रही हो कुछ कहने वाली थी?”
“आं मुझे मुझे याद नहीं आ रहा सोच कर बताऊंगी।”

आशुतोष तीरथ
       गोण्डा

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।