लाॅकडाउन में एक-दूसरे के राज्यों के लोगों को भेजने में क्या होनी चाहिए सावधानियां?

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लाॅकडाउन में एक-दूसरे के राज्यों के लोगों को घर भेजने के लिए वही सावधानियां होनी चाहिए जो युद्धकाल में सेना को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए अपनाई जाती हैं।बल्कि युद्धकाल से भी अधिक सावधानियां बरतनी अति आवश्यक हैं। क्योंकि युद्ध में शत्रु की उपस्थिति स्पष्ट होती है जबकि कोरोना अदृश्य शत्रु है। जिसके अब लक्षण भी दिखाई नहीं दे रहे।जिससे वह और भी अधिक धातक बन गया है।     घर से बाहर फंसे हुए लोगों में अधिकांश मजदूर वर्ग है। जो रोजी-रोटी कमाने के लिए एक राज्य से दूसरे राज्यों में गए हुए हैं। जिन्हें घर लाना उतना ही आवश्यक है जितना विदेशों से भारतीयों को भारत में लाना है। चूंकि वह भी श्रमिक हैं और यह भी श्रमिक हैं।     आज चूंकि अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस भी है और मजदूरों को उनके अपने-अपने राज्यों एवं घरों में पहुंचाना ‘अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस’ का सर्वोच्च सम्मान है। इसलिए प्रवासियों को भी अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस का सम्मान करते हुए प्रशासन का सहयोग करना चाहिए।     ताकि प्रत्येक प्रवासी को कोरोना महामारी के समय लागु समस्त पाबंदियों, दिशा-निर्देशों, चेतावनियों इत्यादि सावधानियों का पालन करते हुए प्रशासन उन्हें साकुशल घर पहुंचा सके।

इंदु भूषण बाली

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।