
समाज हमेसा से दो भागों में बंटा रहा है ,एक अच्छे लोगो मे दूसरा अच्छेपन का दिखावा करने वाले लोगो मे । समाज हमेसा दोहरे मापदंड तय करता है ,और यही समाज का असली रूप है। किसी व्यक्ति का रंग उसके व्यक्तित्व का परिचायक नही हो सकता ,पर सामाजिक रूप से रंग ही उसके व्यक्तित्व ,चरित्र और कार्यो का परिचायक है । समाज मे हमेसा एक व्यक्ति को मानक मान कर दूसरे का रंग तय कर दिया जाता है ,कि यह व्यक्ति उस व्यक्ति से ज्यादा गोरा है या कम गोरा या फिर यह उससे ज्यादा काला है या कम काला । सामाजिकता का खोखला ढोंग करने वाले लोग अक्सर ऐसी बाते करते पाए जाते है , शायद उनकी नजर में यह समाज और लोगो की नजर मे उच्च स्थान प्राप्त करने का उचित तरीका हो । शहरीकरण के इस दौर में प्रायः गांव के लोगो का शहर पलायन होता है और यही रंगभेद का सामना उन्हें काम के दौरान करना पड़ता है। यह गलत है गहरा रंग लेकर पैदा होना शायद गुनाह है …? क्या नेल्सन मंडेला और बराक ओबामा को पैदा होते ही मार देना चाहिए क्यों कि वो गोरे नही थे । नही ,मारना चाहिए तो ऐसी सोच को जो आज कल प्रायः हर लोगो के मन मे पायी जाती है जो अपने रंग को उच्चत्तर व दुसरों के रंग को निम्नतर बताने में लगे रहते है ।दरसल ऐसे लोग मानसिक रूप से पीड़ित होते है ।
मुझे एक वाक्या बहोत अच्छे से याद है कि मेरे ही एक घनिष्ठ मित्र ने मुझे देश में कहीं रंगभेद के कारण हुए अत्याचार के घटना की फ़ोटो भेज कर अप्रत्यक्ष रूप से मुझे वही कहना चाहा जिसकी बात ऊपर अभी तक हुई , घनिष्ठ मित्रो में ऐसे हंसी मजाक आम बात होते है पर क्या ये सही है कि हमेसा ऐसी घटना होने पर उस व्यक्ति पर भी तंज कसा जाए जो ऐसा है ??
समाज हमेसा से ही ऐसी बातों को सही और एक सम्मान के तौर पे देखता आया है जो कि समाज का घिनौना और कड़वा सच है । ऐसे व्यक्तियों से लड़ने के बजाय उनसे सहानभूति प्रदर्शित करनी चाहिए क्यों कि वो एक प्रकार के मनो रोगी है और वह इस पीड़ा से बुरी तरह ग्रस्त है । उन्हें इस बात का ऐहसास कराना चाहिए कि जो उनका गोरा रंग है उसके पीछे एक बेहद काला रंग है जो बाहर के काले रंग से लाख गुना खतरनाक है । उनको यह समझाना चाहिए कि उनका यह रंग उनके व्यक्तित्व को प्रदर्शित नही करता तन गोरा मन काला हुआ तो वह गोरापन किसी काम का नही ।
परिचय-
आलोक कुमार सिंगरौल
जन्म स्थान-शहडोल
वर्तमान में भोपाल में सिविल सेवा की परीक्षा हेतु अध्ययनरत
निवासी-सतना