अम्माँ

manoj jain
बाबू जी नहीं रहे, यह खबर सभी रिश्ते-नातेदारों तक पहुँच खई ।  सुदूरवर्ती बेटे को टेलीफून से सूचित कर दिया गया । वह ठीक समय पर पहुँच गया ।  शाम तक  अंतिम क्रियाकर्म के लिए सभी  आ चुके थे।
घर के बाहर लोगों का जमावड़ा था। महिलाओं ने बड़ी मुश्किल से बाबू जी को शव से अलग कर एक जगह बैठाया।  जहां अकेली अम्मा अर्ध चैतन्य सी बैठी थी कोन आया कोन गया उसे कुछ भी पता न था! दुनियां से बेखबर ,,,,मानो बाबू जी के साथ बिताए एक एक पल को वो रह रह कर याद कर रही हो.
शवयात्रा अपने गन्तव्य की ओर बढ़ती जा रही थी पीछे चलते व्यक्तियों का समूह किसी झुण्ड से कम नज़र न आता था। एक दो लोगों को छोड़कर शवयात्रा से किसी को कोई वास्तविक सम्वेदना न थी,,,,कोई व्यापार की बात करता तो कोई सचिन के छक्कों की,,,,कुल मिलाकर बाबू जी की नश्वरदेह को पंचतत्व में विलीन कर सब अपने अपने घरों की ओर चल दिए.
बाबू जी की तस्वीर के आगे माथा टेक अम्मा अब भी उसी स्थान पर एकांत और अर्धचैतन्य सी बैठी थी। ऊपर के तल पर अम्मा के एकांत जैसा कुछ भी न था बहुएं अपने स्वजनों से बतियानें में मशगूल थीं ,,,,बेटों की मज़बूरी थी ,,,,,,वे  एक दिन से ज्यादा रुक नहीं सकते थे उन्हें ड्यूटी ज्वाइन करनीं थी,,बेटी दामाद के अगले दिन अलग अलग अपॉइंटमेंट थे.
दूसरे ही दिन लगभग पूरा घर खाली हो गया मानो  यहां कुछ भी न हुआ हो बस ,,,,,,अकेली रह गई तो सिर्फ ,,,,अम्माँ,,,,,
#मनोज जैन ‘मधुर’
परिचय : मनोज जैन ‘मधुर’ इस संसार में १९७५ में आए,और आपका निवास ग्राम-बामौरकलां(शिवपुरी, (म.प्र.)है। अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा पाकर निजी कम्पनी में बतौर क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक कार्यरत हैं। आपकी प्रकाशित कृति-एक बूँद हम (गीत संग्रह),काव्य अमृत (काव्य संग्रह)सहित अन्य विविध प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का नियमित प्रकाशन है। दूरदर्शन व आकाशवाणी से भी रचनाएँ प्रसारित हुई हैं। संकलित प्रकाशन में ‘धार पर हम-2’ और  ‘नवगीत नई दस्तकें’  आदि प्रमुख हैं। दो गीत संग्रह तथा पुष्पगिरि खण्डकाव्य  व बालकविताओं का संग्रह  प्रकाशनाधीन है। आपको कई सम्मान मिले हैं,जिसमें खास एक दोहा संग्रह सम्मान-मध्यप्रदेश के राज्यपाल द्वारा सार्वजनिक नागरिक सम्मान(२००९),शिरढोणकर स्मृति सम्मान,म. प्र. लेखक संघ का रामपूजन मलिक नवोदित गीतकार-प्रथम पुरस्कार (२०१०) और अभा भाषा साहित्य सम्मेलन का साहित्यसेवी सम्मान आदि हैं। २०१७ में अभिनव कला परिषद भोपाल द्वारा ‘अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान’ से भी आप सम्मानित हैं। मध्य प्रदेश की इन्दिरा कॉलोनी(बाग़ उमराव दूल्हा)भोपाल में आप रहते हैं।

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दूरदर्शन बिहार के 'बिहार विहान' कार्यक्रम में उपस्थित होंगे डा. शलभ

Sun Mar 24 , 2019
25 मार्च (सोमवार) को दूरदर्शन बिहार DD Bihar के ‘बिहार विहान’ कार्यक्रम में शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डा. स्वयंभू शलभ अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे। यह कार्यक्रम दूरदर्शन से सुबह 8 बजे से 9 बजे तक लाइव प्रसारित होगा।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।