यशपाल निर्मल को सर्व भाषा सम्मान 2018

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जम्मू |
सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली की ओर से के. एल. सहगल हाल, जम्मू कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकैडमी, जम्मू में आयोजित सम्मान समारोह में यशपाल निर्मल को उनकी दीर्घ साहित्यक योगदान और भाषाओं की सेवाओं के लिए सर्व भाषा सम्मान 2018 से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर डॉ दरख्शां अंद्राबी, चेयरपर्सन केंद्रीय वक्फ विकास परिषद्, अल्पसंख्यक मंत्रालय, भारत सरकार मुख्य अतिथि थीं। इस अवसर पर प्रो. अर्चना केसर, पूर्व अध्यक्ष डोगरी विभाग एवं पूर्व डीन जम्मू विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की जबकि डॉ अरविंदर सिंह अमन, सचिव कला केंद्र सोसायटी एवं अतिरिक्त सचिव जम्मू कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकैडमी विशेषातिथि थे।
इस अवसर पर डा. सपना देवी ने यशपाल निर्मल के जीवन, कृत्तित्व और व्यक्तित्व पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यातिथि डॉ दरख्शां अंद्राबी ने कहा कि यशपाल निर्मल का कार्य और योगदान अतुल्नीय है इनको स्टेट अवार्ड के साथ ही अन्य और पुरस्कार जितने भी दिए जाएं कम हैं। उन्होंने कहा पुरस्कारों से किसी भी क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति के कार्य में नखार आता है और उसको और अच्छा और ज्यादा काम करने का उत्साह मिलता है।
प्रो. अर्चना केसर ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में यशपाल निर्मल के कार्यों की प्रशंसा की और कहा जितनी कम आयू में इन्होने इतना काम किया है उस हिसाब से इनको जितने इनाम पुरस्कार मिलें कम हैं।
डॉ अरविंदर सिंह अमन ने अपने वक्तव्य में कहा यशपाल निर्मल कई झरोखों को खोह्लने का कार्य कर रहे हैं। श्री केशव मोहन पाण्डेय जी, संयोजक सर्व भाषा ट्रस्ट ने ट्रस्ट की गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हूए जम्मू कश्मीर इकाई की घोशना भी की। सर्व भाषा ट्रस्ट के वरिष्ठ उपाध्क्ष डॉ मनोज तिवारी जी ने ट्रस्ट के लक्ष्य और उदेशयों पर चर्चा की। मंच संचालन रोशन बराल रोशन ने किया और अतिथियों का विधिवत धन्यवाद श्री केवल कुमार केवल ने किया।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।