दृष्टिकोण

asha jakad

दो भाई थे, जिनकी  उम्र 12 और 10 वर्ष  थी ।उनकी  मां का नाम  सुधा था।एक दिन वे अपनी माता  से बोले मां हम बगीचे में  खेलने जायें ? माता  ने प्रसन्न होकर  उन्हें बगीचे में  खेलने की  अनुमति दे दी ।दोनों  भाई खुशी- खुशी  बगीचे में खेलने गये।थोड़ी देर बाद बड़ा भाई रोते हुए  घर आया  ।सुधा ने पूछा  क्या हुआ बेटा?
अरे मम्मी  वहाँ  तो गुलाब  में  कांटे  लगे हुए  हैं इसलिए  मेरा मन  दुखी ।हो गया।तभी छोटा भाई    हंसते हुए  आया ।सुधा बोली क्या बात है बेटा  तुम बहुत खुश हो ? वह बोला  अरे माँ वहाँ    रंगबिरंगे गुलाब  और उनकी  खुशबू  से मेरा मन प्रसन्न हो गया ।
मुस्कुराती हुई  सुधा बोली  देखो बेटा वस्तु  एक ही है ,बगीचे  में  गुलाब के फूल । तुम गुलाब की सुगंध  और सुन्दरता  को  देखकर  खुश हुए और तुम्हारे  बडे भाई  ने  गुलाब  में  लगे कांटों  को देखा और दुखी  हो गया ।।जो लोग किसी भी  वस्तु के  अच्छे  रूप को देखकर खुश होते  हैं  ऐसे  लोग सकारात्मक  सोच रखते है और  जो किसी   वस्तु  के बुरे  रूप को  देखकर दुखी होते हैं  ऐसे लोग  नकारात्मक सोच रखते हैं ।सकारात्मक  सोच  वाले अपने  जीवन  में हमेशा  आगे  बढते हैं, मुश्किलों के आने पर हताश नहीं  होते   बल्कि  हिम्मत से  सामना  करते हैं ।नकारात्मक सोच वाले छोटी  सी  मुसीबत आने पर हताश  हो जाते हैं और।जीवन में  असफल  रहते है।  अतः हमें हमेशा  सकारात्मक  सोच रखनी चाहिए ।

#आशा जाकड 

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देहरी

Tue Jan 1 , 2019
देहरी  करती  प्रतीक्षा राह   तकते  द्वार  भी मन  है  व्याकुल  देखना चाहे  नयन  के  पार  भी जाने   कितनी   दूर  जा पहुंचे  नगर  से  दूर  तुम हर  दिशा  यादें   तुम्हारी दृश्य  दूजे  सारे  गुम सूख  कर  सहरा  हुए  हैं ये  नयन  के  धार  भी… अर्थ   का   तब   अर्थ   क्या जब  दिन  […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।